नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026। कोयला मंत्रालय ने वाणिज्यिक कोयला खदानों की 15वें दौर की नीलामी तथा 13वें दौर के दूसरे प्रयास के तहत छह कोयला ब्लॉकों की सफल नीलामी पूरी कर ली है। मंत्रालय ने इन नीलामी दौरों की शुरुआत 17 अप्रैल 2026 को की थी, जबकि 3 और 4 अगस्त को आयोजित अग्रिम नीलामी के दौरान सभी छह ब्लॉकों का सफल आवंटन किया गया। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति मिलेगी।
नीलाम किए गए छह कोयला ब्लॉकों में चार पूर्ण रूप से अन्वेषित तथा दो आंशिक रूप से अन्वेषित हैं। इन ब्लॉकों में लगभग 1,503.93 मिलियन टन का भूवैज्ञानिक कोयला भंडार मौजूद है। इनकी संचयी अधिकतम निर्धारित उत्पादन क्षमता 11.62 मिलियन टन प्रति वर्ष है, जिससे भविष्य में देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।
नीलामी में तेलंगाना का पीकेओसी डिप साइड एक्सटेंशन ब्लॉक, डोंगेरी ताल-2, मध्य प्रदेश के मंडला दक्षिण और मार्गो वेस्ट, झारखंड का मार्गो ईस्ट तथा तारा (संशोधित) ब्लॉक सफलतापूर्वक आवंटित किए गए। इन ब्लॉकों की अंतिम बोली विभिन्न सार्वजनिक और निजी कंपनियों ने लगाई, जिनमें सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड, झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड, क्यूब कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड, गैलेंट समूह तथा सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड शामिल हैं।
कोयला मंत्रालय के अनुसार इन छह ब्लॉकों से प्रतिवर्ष लगभग 1,983.67 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। साथ ही करीब 1,743 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश आकर्षित होगा और लगभग 15,710 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे कोयला उत्पादक क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2020 में वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत के बाद से अब तक कुल 147 कोयला ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है। इनकी कुल उत्पादन क्षमता 377.974 मिलियन टन प्रति वर्ष है। सभी ब्लॉकों के परिचालन शुरू होने पर देश को प्रतिवर्ष लगभग 48,215 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने, 54,315 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश आकर्षित होने तथा करीब 4.89 लाख रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है।
कोयला मंत्रालय ने कहा कि वाणिज्यिक कोयला खनन के विस्तार से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही यह पहल आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन के माध्यम से देश की विकास यात्रा को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
