नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026। लोकसभा ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन से संबंधित प्रावधानों को शामिल करने वाले कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) तथा अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों से किए जाने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार मिल जाएगा। हालांकि, विधेयक पारित होने का अर्थ यह नहीं है कि यूपीआई पर शुल्क तत्काल लागू हो गया है।
इस विधायी बदलाव का प्रमुख उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए स्थायी राजस्व मॉडल तैयार करना और बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं तथा भुगतान अवसंरचना से जुड़ी कंपनियों की लागत को पूरा करने का रास्ता तैयार करना है। यूपीआई के विस्तार के साथ लेनदेन की संख्या और डिजिटल भुगतान प्रणाली पर तकनीकी एवं अवसंरचनात्मक दबाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में सरकार और संबंधित क्षेत्र लंबे समय से भुगतान व्यवस्था के लिए टिकाऊ वित्तीय मॉडल की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।
विधेयक में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के उस मौजूदा प्रावधान में बदलाव का प्रस्ताव है, जो अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर व्यापारी छूट दर यानी एमडीआर लगाने से रोकता है। संशोधन के बाद सरकार को आवश्यक नियमों के माध्यम से इस तरह के शुल्क की अनुमति देने का अधिकार प्राप्त होगा।
एमडीआर सामान्य तौर पर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारियों से भुगतान प्रक्रिया से जुड़े बैंक या सेवा प्रदाता लेते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में एमडीआर लागू किया जाता है, तो इसका सीधा भार उपभोक्ताओं पर डालने का प्रावधान नहीं है। इसलिए आम लोगों के बीच यह धारणा कि विधेयक पारित होते ही प्रत्येक यूपीआई भुगतान पर शुल्क देना होगा, सही नहीं है। शुल्क की दर, दायरा और किन लेनदेन पर इसे लागू किया जाएगा, यह आगे सरकार के निर्णय और नियमों पर निर्भर करेगा।
वर्तमान में यूपीआई के अधिकांश सामान्य लेनदेन बिना प्रत्यक्ष शुल्क के किए जाते हैं। सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इस व्यवस्था को लंबे समय तक प्रोत्साहित किया है। दूसरी ओर, बड़े कारोबारियों से जुड़े कुछ विशिष्ट यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू करने की संभावना को लेकर पहले से चर्चा होती रही है। जुलाई में सामने आई रिपोर्टों में बड़े कारोबारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर सीमित एमडीआर लागू किए जाने की संभावनाओं का उल्लेख किया गया था।

विधेयक में आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में भी संशोधन का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने सदन में विधेयक को विचार के लिए प्रस्तुत किया। इसके बाद लोकसभा ने ध्वनि मत से इसे पारित कर दिया।
यूपीआई देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था का प्रमुख आधार बन चुका है। वित्त मंत्रालय के अनुसार जून 2026 तक यूपीआई से जुड़े उपयोगकर्ताओं की संख्या 55.49 करोड़ थी। वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के माध्यम से 24,162 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 314 लाख करोड़ रुपये रहा।
विधेयक पारित होने के बाद अब निगाहें सरकार की ओर रहेंगी कि वह शुल्क लगाने की व्यवस्था को किस रूप में लागू करती है। इसके लिए शुल्क की दर, लेनदेन की सीमा, कारोबारियों की श्रेणी और अन्य नियम तय किए जाना महत्वपूर्ण होगा। इस बदलाव का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना है, जबकि आम नागरिकों और छोटे कारोबारियों पर इसके प्रभाव को लेकर अंतिम तस्वीर सरकार के नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
