रायपुर, 18 अगस्त 2026/छत्तीसगढ़ में पर्यावरण, प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 14 से 16 अगस्त 2026 तक तीन दिवसीय हरेली बर्ड फेस्टिवल 2026 का आयोजन किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मार्गदर्शन तथा वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में प्रदेशभर से व्यापक जनभागीदारी रही। इसका उद्देश्य पक्षी संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण और इको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना रहा।

हरेली बर्ड फेस्टिवल में नागरिक विज्ञान के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पक्षी विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण किया गया। राज्य के सभी 33 जिलों में 45 बर्ड वॉक आयोजित किए गए, जिनमें 1,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।

कोपरा जलाशय, चिच्छा वेटलैंड, बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य, अचानकमार टाइगर रिजर्व और नंदनवन जंगल सफारी सहित कई महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों और वन क्षेत्रों में पक्षियों का सर्वेक्षण किया गया। नंदनवन जंगल सफारी में दिव्यांगजनों के लिए विशेष बर्ड वॉक भी आयोजित किया गया।
नागरिक विज्ञान मंच ईबर्ड के माध्यम से एकत्र आंकड़ों के अनुसार तीन दिनों में कुल 954 चेकलिस्ट के जरिए 211 पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया। इनमें पेंटेड स्टॉर्क, रेड-नेप्ड आइबिस, कॉटन पिग्मी-गूज, इंडियन पैराडाइज-फ्लाईकैचर और ग्रेटर रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल हैं।

अभियान को स्थानीय समुदाय और आजीविका से भी जोड़ा गया। रायपुर जिले के मांढर ग्राम पंचायत के अड़बंधा तालाब में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भागीदारी की। कलश स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित फूड कार्ट स्थानीय समुदाय की पहल और आजीविका संरक्षण के समन्वय का उदाहरण बना।

आयोजन से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य में महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की नियमित निगरानी, पक्षी मित्र नेटवर्क को मजबूत करने तथा स्कूलों और समुदायों में पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।

