नई दिल्ली। छोटे बच्चों की दवा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाले सभी फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन यानी एफडीसी के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक इन दवाओं को चार साल से कम उम्र के बच्चों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। सरकार ने निर्माताओं के लिए इन दवाओं पर स्पष्ट चेतावनी लिखना भी अनिवार्य कर दिया है। यह आदेश राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी हो गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा कंपनियों को निर्देश दिया है कि संबंधित एफडीसी के लेबल, पैकेज के साथ दिए जाने वाले निर्देश यानी पैकेज इंसर्ट और प्रचार सामग्री पर साफ शब्दों में लिखा जाए कि यह कॉम्बिनेशन चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। सरकार के अनुसार इस आयु वर्ग के बच्चों में इन दवाओं के इस्तेमाल से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम हो सकते हैं और इनके सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं।
सरकार का यह फैसला विशेषज्ञ समिति और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड यानी डीटीएबी की सिफारिशों के बाद लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब केवल किसी विशेष मात्रा या एक खास फॉर्मूलेशन तक प्रतिबंध सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाले सभी संबंधित फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन पर चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए यह आयु-विशिष्ट प्रतिबंध लागू होगा।
दरअसल, इस संयोजन को लेकर बच्चों में इसके इस्तेमाल पर चिंता पहले भी सामने आती रही है। दिसंबर 2023 में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने संबंधित निर्माताओं को चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इस एफडीसी का इस्तेमाल नहीं करने संबंधी चेतावनी लेबल और पैकेज इंसर्ट पर दर्ज करने का निर्देश दिया था। यह कदम विषय विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर उठाया गया था।
इसके बाद 15 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार ने क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड के कुछ एफडीसी पर इसी तरह की आयु-विशिष्ट पाबंदी लागू की थी। अब नई अधिसूचना ने इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाकर इन दोनों घटकों वाले सभी संबंधित फॉर्मूलेशन तक कर दिया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह कार्रवाई जनस्वास्थ्य के हित में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य छोटे बच्चों को ऐसी दवाओं के संभावित जोखिम से बचाना और दवाओं के तर्कसंगत एवं सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इसी वर्ष जून में भी जनहित में 16 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगाई थी। इन दवाओं की समीक्षा विशेषज्ञ समिति और डीटीएबी की सिफारिशों के आधार पर की गई थी। सरकार ने कहा था कि वैज्ञानिक आधार और चिकित्सीय औचित्य सुनिश्चित करना दवा नियमन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नए आदेश के बाद अभिभावकों के लिए यह जरूरी है कि चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सर्दी-जुकाम या अन्य लक्षणों के लिए कोई दवा स्वयं न दें। बच्चे के लिए किसी भी दवा का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए। सरकार की नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यही है कि बच्चों के लिए दवाओं का इस्तेमाल अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से हो।
