उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने लॉन्च किया ‘ज्ञानी अर्थ’, भारत के स्वदेशी एआई स्टैक को मिली नई पहचान

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में ‘ज्ञानी अर्थ’ नामक संप्रभु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) स्टैक का शुभारंभ किया। ज्ञानी एआई द्वारा विकसित इस एआई स्टैक में इवोन 3.3 और प्लेक्सस शामिल हैं। इवोन 3.3 एक बड़ा भाषा मॉडल है, जबकि प्लेक्सस ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो एआई की क्षमताओं को वास्तविक दुनिया के कार्यों और संस्थागत जरूरतों से जोड़ने का काम करता है।

‘ज्ञानी अर्थ’ के लॉन्च के अवसर पर उपराष्ट्रपति ने इसे भारत के तेजी से विकसित हो रहे प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इवोन 3.3 और प्लेक्सस का संयोजन यह दर्शाता है कि भारतीय इंजीनियर केवल अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक स्तर की प्रौद्योगिकी का निर्माण करने की क्षमता भी रखते हैं।

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि दुनिया ने टाइपराइटर और सीमित कंप्यूटर उपयोग के दौर से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बड़े भाषा मॉडल के युग तक लंबी तकनीकी यात्रा तय की है। उन्होंने कहा कि जब कंप्यूटर तकनीक तेजी से विकसित हो रही थी, तब रोजगार खत्म होने की आशंकाएं जताई जाती थीं, लेकिन इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने भारत समेत पूरी दुनिया में रोजगार के नए अवसर पैदा किए।

उपराष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी रोजगार के अवसरों और आर्थिक विकास के नए रास्ते खोलेगी। उनके अनुसार एआई भारत की उत्पादकता, नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाकर देश की आर्थिक प्रगति को नई गति दे सकता है।

उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का उल्लेख करते हुए इंडियाएआई मिशन और एआई उत्कृष्टता केंद्रों जैसी पहलों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इन पहलों से देश में एआई के अनुसंधान, विकास और उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और ‘भारत प्रथम’ दृष्टिकोण को भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि भारत को केवल प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहिए। देश को ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी जिसका उपयोग दुनिया के दूसरे देश भी कर सकें। उन्होंने कहा, “हमें सदैव उपभोक्ता नहीं बने रहना चाहिए; हमें सृजन करना चाहिए, ताकि दूसरे उसका उपभोग कर सकें।” उन्होंने स्वदेशी तकनीकी क्षमता को मजबूत करने को भारत की रणनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए आवश्यक बताया।

संसद में एआई के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने डिजिटल संसद पोर्टल की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसदीय बहसों और दस्तावेजों को कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने में तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हाल में संसदीय कार्यवाही में आठ भाषाओं में एआई आधारित अनुवाद सेवा शुरू की गई है और इसे आगे सभी अनुसूचित भाषाओं तक विस्तार देने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि भारत को उन्नत तकनीक के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी घरेलू क्षमताएं विकसित करनी होंगी। सेमीकंडक्टर, एआई और अन्य उभरती तकनीकों में निवेश को भारत के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षमता विकसित भारत @2047 के लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

उपराष्ट्रपति ने ‘ज्ञानी अर्थ’ को तकनीकी आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भारत की व्यापक यात्रा का हिस्सा बताया। उन्होंने ज्ञानी एआई के सीईओ गणेश गोपालन और सह-संस्थापक एवं सीटीओ अनंत नागराज को लॉन्च के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि यह पहल भारत को अधिक आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने में योगदान देगी।

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