जगदलपुर, 31 अगस्त। झीरम घाटी नरसंहार मामले में 31 अगस्त को आने वाला फैसला टल गया है। अब जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत इस मामले में आगामी 5 सितंबर को फैसला सुनाएगी। करीब 13 वर्षों से चल रहे इस बहुचर्चित मामले में अदालत ने पहले 31 अगस्त को फैसला सुनाने की तारीख निर्धारित की थी। फैसले की तारीख टलने के बाद पीड़ित परिवारों, राजनीतिक दलों और बस्तरवासियों की निगाहें अब 5 सितंबर पर टिक गई हैं।
झीरम घाटी कांड ने 25 मई 2013 को पूरे देश को झकझोर दिया था। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से जगदलपुर की ओर लौट रही थी। इसी दौरान दरभा क्षेत्र की पहाड़ियों के बीच स्थित झीरम घाटी में पहले से घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने काफिले पर हमला कर दिया। एनआईए के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार हमला शाम करीब 4:15 बजे हुआ था और इसमें 27 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 38 लोग घायल हुए थे।
जांच एजेंसी के अनुसार मामले में हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, डकैती, हथियार कानून और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। झीरम घाटी नरसंहार में तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार और योगेंद्र शर्मा सहित कई कांग्रेस नेता तथा सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। महेंद्र कर्मा को नक्सलियों का प्रमुख दुश्मन माना जाता था और वे लंबे समय से नक्सल हिंसा के खिलाफ मुखर रहे थे।
नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले को चारों तरफ से घेरकर गोलीबारी की थी। हमले के बाद घटनास्थल से हथियार और संचार उपकरण भी लूटे जाने की बात एनआईए के रिकॉर्ड में दर्ज है। घटना के दो दिन बाद एनआईए ने मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। एनआईए ने सितंबर 2014 में नौ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद सितंबर 2015 में पूरक आरोप पत्र भी दाखिल किया गया।
मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान 294 सुनवाइयां हुईं और बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अगस्त 2026 में अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 31 अगस्त की तारीख निर्धारित की थी। अब फैसला 5 सितंबर को सुनाए जाने की संभावना है।
इस बीच बस्तर जिला मुख्यालय में आयोजित कांग्रेस के संभाग स्तरीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम घाटी मामले की जांच और संभावित फैसले को लेकर केंद्र तथा जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जांच में कई बुनियादी और महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल ही नहीं किया गया है। ऐसे में आम जनता और कांग्रेस पार्टी जिस न्याय और सच्चाई की उम्मीद कर रही थी, उसकी संभावना न के बराबर है। उन्होंने कहा कि अधूरी और दिशाहीन जांच के आधार पर आने वाले फैसले से सही न्याय मिलना नामुमकिन है।

भूपेश बघेल ने कहा कि 25 मई 2013 की घटना विशुद्ध रूप से एक राजनीतिक और आपराधिक षड्यंत्र थी। उनके अनुसार जांच में जिस मुख्य साजिश का पर्दाफाश होना चाहिए था, उस दिशा में कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि एनआईए न्यायालय ने घटना के समय झीरम घाटी में मौजूद कई प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ितों के बयान तक दर्ज नहीं किए। घटना में शामिल और बाद में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली गुडसा उसेंडी से भी सही तरीके से पूछताछ नहीं होने का आरोप उन्होंने लगाया। इसके अलावा आंध्र प्रदेश की जेलों में बंद कई संदिग्ध नक्सलियों के बयान नहीं लिए जाने की बात भी उन्होंने कही।
भूपेश बघेल ने कहा कि जांच एजेंसी ने अदालत में जो रिपोर्ट प्रस्तुत की है, न्यायालय उसी के आधार पर अपना फैसला सुनाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और पीड़ित परिवार लंबे समय से झीरम घाटी की घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आने और न्याय मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
राहुल गांधी के बस्तर दौरे को लेकर भूपेश बघेल ने बताया कि राहुल गांधी लंबे समय से छत्तीसगढ़ नहीं आए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से उन्हें राज्य का दौरा करने का न्योता दिया गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए बस्तर आने पर सहमति जताई है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी इन दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार संवाद कर रहे हैं। हालांकि बस्तर में उनका फोकस केवल छात्र और युवा वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा। बस्तर की स्थानीय समस्याओं, जमीनी चुनौतियों और क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा किए जाने की योजना है।
वहीं भाजपा की ओर से कांग्रेस को लेकर किए जा रहे पोस्टरवार पर भूपेश बघेल ने भाजपा पर समाज में नफरत फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा का काम लोगों को आपस में बांटना रहा है।
