देशव्यापी अभियान में 3,800 से अधिक बच्चे बाल श्रम से मुक्त, 575 से ज्यादा एफआईआर दर्ज

नई दिल्ली। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने बाल श्रम, मानव तस्करी और बच्चों के शोषण के खिलाफ चलाए गए देशव्यापी विशेष अभियान के दौरान 3,800 से अधिक बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया है। अभियान के दौरान विभिन्न मामलों में 575 से अधिक प्राथमिकी भी दर्ज की गई हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, यह विशेष ‘पैन-इंडिया रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन’ अभियान 12 जून से 31 अगस्त 2026 तक चलाया गया।

अभियान का उद्देश्य बाल श्रम में लगे बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित निकालना, तस्करी और शोषण के जोखिम वाले बच्चों की सुरक्षा करना तथा बचाव के बाद उनके पुनर्वास और शिक्षा से जोड़ने की प्रक्रिया को मजबूत करना था। एनसीपीसीआर ने इस अभियान को राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, जिला मजिस्ट्रेटों, श्रम विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग से संचालित किया। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अभियान तेज किया गया, जिन्हें बाल श्रम और मानव तस्करी के संभावित हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया था।

अभियान के दौरान अधिकारियों को बच्चों से जुड़े मामलों में केवल तत्काल बचाव तक सीमित न रहने, बल्कि बचाए गए बच्चों के पुनर्वास और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए। आयोग ने राज्यों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर बचाव अभियानों की निगरानी की और बचाए गए बच्चों से जुड़ी आगे की कार्रवाई की जानकारी भी साझा करने पर जोर दिया।

अभियान के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 1,480 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। इसके बाद राजस्थान में 804 और गुजरात में 630 बच्चों का बचाव किया गया। बिहार में 183 तथा आंध्र प्रदेश में 147 बच्चों को अभियान के दौरान बाल श्रम से मुक्त कराया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अभियान का दायरा देश के अलग-अलग हिस्सों में व्यापक रहा और राज्यों ने स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की।

बच्चों के बचाव के साथ-साथ आपराधिक मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की गई। अभियान के दौरान 575 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं। इससे बाल श्रम कराने, बच्चों की तस्करी या उनके शोषण से जुड़े मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। आयोग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बचाव अभियानों के आंकड़े तथा पुनर्वास से जुड़ी प्रगति की नियमित निगरानी करने पर भी जोर दिया।

एनसीपीसीआर ने अभियान के समानांतर जागरूकता और जनसंपर्क गतिविधियां भी संचालित कीं। सोशल मीडिया तथा अन्य संचार माध्यमों के जरिए लोगों को बाल श्रम की घटनाओं की सूचना देने, बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने और बचाव के बाद उनके पुनर्वास तथा शिक्षा की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया गया। आयोग का मानना है कि बाल श्रम को समाप्त करने के लिए केवल सरकारी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों के क्रियान्वयन की निगरानी करने वाला वैधानिक निकाय है। आयोग बाल श्रम के अलावा बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण, शिक्षा तथा बच्चों के खिलाफ होने वाले विभिन्न प्रकार के शोषण से जुड़े मामलों में भी निगरानी और हस्तक्षेप करता है।

देशव्यापी अभियान में 3,800 से अधिक बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया जाना बाल अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि, बचाव के बाद बच्चों को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा, परामर्श और दीर्घकालिक पुनर्वास उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सरकार और संबंधित एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से बाल श्रम तथा बच्चों की तस्करी और शोषण के खिलाफ कार्रवाई को आगे और मजबूत करने की उम्मीद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *