प्राकृतिक संसाधन आजीविका और आर्थिक सशक्तीकरण को दे रहे गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), भुवनेश्वर द्वारा आयोजित अंतरराज्यीय मीडिया एक्सपोजर टूर के तहत ओडिशा से आए मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने आज रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात की। इस दौरान पत्रकारों ने छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा, प्राकृतिक संसाधनों की संभावनाओं, वन आधारित आजीविका तथा स्थानीय समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण से जुड़ी पहलों की जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने ओडिशा के मीडिया प्रतिनिधिमंडल का छत्तीसगढ़ में स्वागत करते हुए कहा कि ओडिशा के पत्रकारों का छत्तीसगढ़ आना राज्य के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने विकास कार्यों और शासन की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस एक महीने के अभियान के तहत 13 अलग-अलग कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इनमें महिलाओं, किसानों, श्रमिकों, व्यापारियों, चिकित्सकों और इंजीनियरों सहित समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी होगी।

विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में उद्योग, व्यापार और प्राकृतिक संसाधनों की व्यापक संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य में लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, हीरा, सोना और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की समृद्ध वन संपदा भी स्थानीय लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ के लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग पर वन क्षेत्र है। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे पौधरोपण अभियानों और कैंपा निधि के माध्यम से किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया।

वनोपज के माध्यम से ग्रामीण और जनजातीय अर्थव्यवस्था को मिल रहे सहयोग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 13 लाख परिवार तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हैं। सरकार की ओर से संग्राहकों को प्रति मानक बोरा 5,500 रुपये की राशि दी जाती है तथा तेंदूपत्ता संग्रहण में लगे लोगों को चरण पादुकाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। तेंदूपत्ता बिक्री से प्राप्त लाभ को बोनस और लाभांश की व्यवस्था के माध्यम से हितग्राहियों तक पहुंचाया जाता है।

मुख्यमंत्री ने महुआ, इमली और सीताफल जैसे वन उत्पादों में मूल्य संवर्धन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि वन उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं तथा स्थानीय समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण में सहायता मिल रही है।

ओडिशा के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने भी अपने भ्रमण के अनुभव साझा किए। प्रतिनिधिमंडल ने सिरपुर, एसईसीएल की गेवऱा खदान, एनटीपीसी कोरबा और बाल्को का भ्रमण किया। इन यात्राओं के माध्यम से पत्रकारों ने छत्तीसगढ़ की पुरातात्विक विरासत, खनन, ऊर्जा, औद्योगिक गतिविधियों और सामुदायिक विकास से जुड़े कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

इस संवाद से पत्रकारों को अपने क्षेत्रीय भ्रमण के अनुभवों को छत्तीसगढ़ की व्यापक विकास दृष्टि से जोड़ने और प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से आजीविका तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के राज्य के प्रयासों को समझने का अवसर मिला। मीडिया प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण का समन्वय केंद्रीय संचार ब्यूरो, संबलपुर के सहायक निदेशक मनमोहन पाधी तथा प्रेस सूचना ब्यूरो, भुवनेश्वर के सूचना सहायक विकास रंजन दलई ने किया।

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