नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026। भारत में महिलाओं की श्रम बल में भागीदारी को लेकर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के पहली बार जारी जिलास्तरीय आंकड़ों में महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार देश के करीब 57.8 प्रतिशत जिलों में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 40 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज की गई है। पहली बार जारी इन जिलास्तरीय श्रम बाजार अनुमानों में श्रम बल भागीदारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात, बेरोजगारी दर और रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर युवाओं यानी NEET से जुड़े आंकड़े शामिल किए गए हैं।
महिला श्रम बल भागीदारी के मामले में विभिन्न जिलों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में महिला LFPR 80.9 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद ओडिशा के मयूरभंज में 71.8 प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर के बडगाम में 71.4 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ के सरगुजा में 69 प्रतिशत महिला LFPR दर्ज हुई। यह आंकड़ा सरगुजा को देश के उन जिलों में शामिल करता है जहां महिलाओं की श्रम बाजार में भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का प्रदर्शन भी जिलास्तरीय आंकड़ों में सामने आया है। राज्य की राजधानियों से संबंधित आंकड़ों में रायपुर का श्रम बल भागीदारी दर 61.5 प्रतिशत और श्रमिक जनसंख्या अनुपात 59.4 प्रतिशत दर्ज किया गया। राजधानी जिलों की तुलना में रायपुर के ये आंकड़े श्रम बाजार में अपेक्षाकृत व्यापक भागीदारी को दर्शाते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी के लिए लगभग 98 प्रतिशत जिलों में LFPR और WPR 40 से 80 प्रतिशत के दायरे में रहे। वहीं देश के करीब 77.8 प्रतिशत जिलों में बेरोजगारी दर 0.5 से 5.5 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई। आंकड़ों में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के उन युवाओं की स्थिति भी शामिल की गई है, जो रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण में नहीं हैं। तीन-चौथाई से अधिक जिलों में ऐसे युवाओं की NEET दर 30 प्रतिशत से कम रही।
देश के 100 सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में गुजरात का सूरत जिला 68.6 प्रतिशत LFPR के साथ सबसे ऊपर रहा। यहां श्रमिक जनसंख्या अनुपात 67.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद बिहार का अररिया और तमिलनाडु का सलेम रहा। दूसरी ओर बिहार के दरभंगा में LFPR और WPR दोनों का स्तर इस समूह में सबसे कम रहा।
महिला श्रम भागीदारी के आंकड़ों में दूसरी ओर कुछ जिलों में काफी कम दर भी दर्ज हुई। पूर्वी दिल्ली में महिला LFPR 18.9 प्रतिशत, बिहार के सीवान में 24.7 प्रतिशत और पंजाब के पटियाला में 39.3 प्रतिशत रही। इससे देश के अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं की श्रम बाजार में भागीदारी के बीच अंतर का पता चलता है।
हाल में जारी अगस्त 2026 के राष्ट्रीय PLFS आंकड़ों के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की अखिल भारतीय LFPR 34.8 प्रतिशत रही, जो अगस्त 2025 के स्तर से 1.1 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर भी महिला श्रम भागीदारी में वृद्धि की प्रवृत्ति दिखाई देती है। हालांकि जिलास्तरीय आंकड़े यह भी बताते हैं कि महिलाओं की भागीदारी राज्यों और जिलों के अनुसार काफी अलग-अलग है।

NSO के इन जिलास्तरीय अनुमानों से पहली बार देश के स्थानीय श्रम बाजार की अधिक विस्तृत तस्वीर सामने आई है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, रोजगार की स्थिति और युवाओं की रोजगार से जुड़ाव की स्थिति को अधिक स्थानीय स्तर पर समझने में सहायता मिलेगी।
