एचएनएलयू और छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम ‘डिफेंडिंग द डिजिटल फ्रंटियर’ का आयोजन किया

रायपुर, 25 सितंबर 2026/ उभरते साइबर खतरों के प्रति जन-जागरूकता को मजबूत करने और डिजिटल सुरक्षा की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नवा रायपुर के सेंटर फॉर इंटरनेट गवर्नेंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (CIGAI) ने छत्तीसगढ़ पुलिस के सहयोग से 24 सितंबर 2026 को ‘डिफेंडिंग द डिजिटल फ्रंटियर–ए साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस प्राइमर’ कार्यक्रम का आयोजन किया। यह पहल छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे राज्यव्यापी ‘साइबर जागृति अभियान’ का महत्वपूर्ण हिस्सा थी।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान साइबर अपराध के तेजी से बदलते स्वरूप, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, महिलाओं तथा संवेदनशील वर्गों से जुड़ी साइबर सुरक्षा चुनौतियों और डिजिटल युग में उभरते कानूनी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव ने साइबर अपराधियों के बदलते तौर-तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपराधी अक्सर रिश्तेदारों या परिचितों का छद्म रूप धारण कर फर्जी कॉल के जरिए आम लोगों को निशाना बनाते हैं।

यादव ने युवाओं से आग्रह किया कि वे किसी भी अनजाने संचार या कॉल पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया न दें। उन्होंने विद्यार्थियों से ‘डिजिटल सेफ्टी एम्बेसडर’ बनने का आह्वान किया, ताकि वे अपने परिवारों, मित्रों और स्थानीय समुदायों तक साइबर सुरक्षा का संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचा सकें।

एचएनएलयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानंदन ने कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीक का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल युग में जिम्मेदार नागरिकता का अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दोहरी भूमिका पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि AI जहां परिवर्तनकारी अवसर प्रस्तुत करता है, वहीं इसका दुरुपयोग अधिक जटिल साइबर अपराधों को अंजाम देने में भी हो सकता है। उन्होंने अज्ञात लिंक पर क्लिक न करने, अवांछित संदेशों से सतर्क रहने और निजी जानकारी साझा करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।

रायपुर ग्रामीण की पुलिस अधीक्षक श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने कहा कि साइबर अपराधों से बचाव में सजगता और सतर्कता ही सुरक्षा की पहली पंक्ति हैं। उन्होंने युवाओं से साइबर फ्रॉड के शुरुआती संकेतों को पहचानने, सुरक्षित डिजिटल आदतों को अपनाने और किसी भी संदिग्ध घटना या धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराने का आग्रह किया।

एचएनएलयू के कुलसचिव प्रभारी डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसे डिजिटली जिम्मेदार नागरिक तैयार करें, जो इस तकनीकी वातावरण में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकें।

कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों के माध्यम से कानूनी सैद्धांतिक समझ को व्यावहारिक सुरक्षा उपायों से जोड़ा गया। कार्यक्रम के अंत में प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. अतुल जायभाय ने छत्तीसगढ़ पुलिस, विश्वविद्यालय प्रशासन, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

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