कृषि जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त राशि से संरक्षण, अनुसंधान और स्थानीय समुदायों की आजीविका को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर, 18 अक्टूबर 2026। देश में जैव विविधता के संरक्षण, जैविक संसाधनों के टिकाऊ उपयोग और स्थानीय समुदायों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) व्यवस्था के अंतर्गत 29 राज्य जैव विविधता परिषदों और एक केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को कुल 1.19 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। यह राशि कृषि जैविक संसाधनों के अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग के लिए कंपनियों से प्राप्त योगदान के रूप में दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों को संरक्षण कार्यों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचाना है।
कृषि जैविक संसाधनों के आधार पर हुआ राशि का आवंटन
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अनुसार, मक्का, चावल, बाजरा और कपास जैसी कृषि फसलों से संबंधित जैविक संसाधनों के अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग के लिए विभिन्न कंपनियों से एबीएस योगदान प्राप्त हुआ। चूंकि इन संसाधनों की खरीद बाजारों और व्यापारियों के माध्यम से की गई थी, इसलिए व्यक्तिगत लाभार्थियों की पहचान करना संभव नहीं था। इस कारण विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा और प्राधिकरण की स्वीकृति के आधार पर वितरण व्यवस्था अपनाई गई। राज्यों को संबंधित फसलों के अनुमानित कृषि क्षेत्रफल और केंद्र सरकार के आधिकारिक कृषि आंकड़ों के अनुपात में राशि आवंटित की गई।
जारी विवरण के अनुसार, महाराष्ट्र को लगभग 19.46 लाख रुपये, राजस्थान को 13.98 लाख रुपये, मध्य प्रदेश को 13.32 लाख रुपये और कर्नाटक को लगभग 10.50 लाख रुपये मिले हैं। तेलंगाना को 9.56 लाख रुपये, गुजरात को 8.85 लाख रुपये, उत्तर प्रदेश को 8.27 लाख रुपये, बिहार को 4.82 लाख रुपये, आंध्र प्रदेश को 4.28 लाख रुपये और पश्चिम बंगाल को 3.72 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सामूहिक रूप से लगभग 21.87 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं।
छत्तीसगढ़ में जैव विविधता संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण व्यवस्था
छत्तीसगढ़ में वन, वनस्पतियों, कृषि फसलों और स्थानीय जैविक संसाधनों की विविधता संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। राज्य में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के माध्यम से जैव विविधता अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन तथा स्थानीय स्तर पर जैविक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कार्य किए जाते हैं। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की इस वितरण व्यवस्था में राज्य जैव विविधता परिषदों की भागीदारी शामिल है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में छत्तीसगढ़ के लिए अलग से आवंटित राशि का उल्लेख नहीं है। इसलिए राज्य को मिली सटीक राशि की पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।
203 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण अब तक जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका को सहयोग देने के लिए 203 करोड़ रुपये से अधिक वितरित कर चुका है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्राप्त राशि का उपयोग जैव विविधता का दस्तावेजीकरण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, उनका सतत उपयोग, स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों को मजबूत करने, अनुसंधान, प्रशिक्षण और सामुदायिक आजीविका में सुधार जैसे कार्यों के लिए किया जाएगा।

यह पहल कृषि जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से प्राप्त लाभों को संरक्षण और जनकल्याण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भारत जैविक विविधता सम्मेलन के 17वें सम्मेलन (सीओपी-17) की तैयारी भी कर रहा है, जो 19 से 30 अक्टूबर 2026 तक आर्मेनिया के येरेवन में आयोजित होना निर्धारित है। ऐसे में जैविक संसाधनों के संरक्षण के साथ उनसे प्राप्त लाभों का उचित वितरण देश की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को मजबूत करने में सहायक होगा।
