नक्सलवाद के खात्मे के बाद बढ़ेगी सुरक्षा, महाराष्ट्र और तेलंगाना के साथ मिलकर बनेगी टास्क फोर्स
बीजापुर। नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त होने के बाद अब बस्तर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल शुरू की जा रही है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना के वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की अंतरराज्यीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में तीनों राज्यों की सीमाओं से लगे वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार पर प्रभावी रोक लगाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि तीनों राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहतर समन्वय के साथ काम किया जाएगा। इसके लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने के साथ ही संयुक्त पेट्रोलिंग की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमित गश्त कर वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा दूसरे राज्यों से आने वाले शिकारियों और वन्यजीव तस्करों पर नजर रखने के लिए संयुक्त टीमों को भी सक्रिय किया जाएगा।

अधिकारियों का मानना है कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व का बड़ा क्षेत्र तीन राज्यों की सीमाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए केवल एक राज्य के स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय तीनों राज्यों के वन विभागों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से अंतरराज्यीय बैठक में सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त कार्रवाई और नियमित गश्त को लेकर रणनीति तैयार की गई।
पर्यटन शुरू करने की दिशा में भी तैयारी
बैठक में इंद्रावती टाइगर रिजर्व को सुरक्षित बनाने के साथ ही पर्यटकों के लिए इसे खोलने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। महाराष्ट्र और तेलंगाना की ओर से पर्यटकों के लिए वन क्षेत्रों में प्रवेश की शुरुआत की जा चुकी है। वहीं छत्तीसगढ़ की ओर से इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन गतिविधियों को शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आगामी नवंबर-दिसंबर तक बीजापुर जिले के फरसेगढ़ क्षेत्र से पर्यटकों के लिए प्रवेश द्वार शुरू किए जाने की संभावना है। इससे पर्यटक इंद्रावती टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक सौंदर्य और यहां मौजूद वन्यजीवों को करीब से देख सकेंगे।

बस्तर के मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि नक्सलवाद के प्रभाव में रहने वाला इंद्रावती क्षेत्र अब पहले की तुलना में काफी सुरक्षित हुआ है। इसी बदलते सुरक्षा वातावरण को देखते हुए वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विकास की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र और तेलंगाना के वन अधिकारियों के साथ हुई बैठक में बाघों समेत अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर विशेष रणनीति पर चर्चा की गई है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व करीब 2799 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। कभी यह इलाका नक्सल गतिविधियों के कारण आम लोगों और पर्यटकों की पहुंच से दूर रहा। अब सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद वन विभाग का प्रयास है कि इस क्षेत्र की जैव विविधता और वन्यजीवों को संरक्षित करते हुए पर्यटन की संभावनाओं को भी विकसित किया जाए।

तीनों राज्यों के बीच समन्वित सुरक्षा व्यवस्था, संयुक्त पेट्रोलिंग और टास्क फोर्स के गठन से इंद्रावती टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के संरक्षण को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में पर्यटकों के लिए प्रवेश शुरू होने से बस्तर के इस प्राकृतिक और वन्यजीव संपदा से समृद्ध क्षेत्र को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान मिलने की संभावना है।
