राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर देशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी रहे उपस्थित, बस्तर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का बढ़ा राष्ट्रीय महत्व

रायपुर, 23 अक्टूबर 2026। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को जगदलपुर स्थित बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने देशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी उपस्थित रहे।

मां दंतेश्वरी के दर्शन-पूजन के दौरान राष्ट्रपति ने बस्तर की आराध्य देवी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मां दंतेश्वरी का मंदिर बस्तर की धार्मिक आस्था, प्राचीन परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र है। यहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। राष्ट्रपति का मंदिर पहुंचकर पूजा करना बस्तर की धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं के राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह छत्तीसगढ़ प्रवास 22 और 23 अक्टूबर को निर्धारित था। राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्रवास के पहले दिन 22 अक्टूबर को उन्होंने रायपुर स्थित लोकभवन में पूज्य माता हासी देवी के सम्मान में 200 रुपये मूल्यवर्ग का स्मारक सिक्का जारी किया। इसके बाद वे नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम में शामिल हुईं।

प्रवास के दूसरे दिन जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद राष्ट्रपति बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित मुरिया दरबार और सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचीं। उनके इस दौरे से बस्तर की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं और जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली।

बस्तर दशहरा की विशिष्ट परंपरा

बस्तर दशहरा देश के विशिष्ट सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस पर्व की विशेषता यह है कि यह परंपरागत रूप से मां दंतेश्वरी को समर्पित है। देश के अन्य हिस्सों में मनाए जाने वाले दशहरे से इसकी धार्मिक मान्यताएं, अनुष्ठान और आयोजन की परंपराएं अलग हैं। इसमें बस्तर की जनजातीय संस्कृति, सामुदायिक सहभागिता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

मुरिया दरबार इस आयोजन का एक प्रमुख हिस्सा है। यह पारंपरिक सभा बस्तर के स्थानीय समुदायों, पारंपरिक प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच संवाद का मंच मानी जाती है। इसके माध्यम से क्षेत्र की परंपराओं और जनसरोकारों को अभिव्यक्ति मिलती है।

राष्ट्रपति के मंदिर दर्शन और बस्तर दशहरा से जुड़े कार्यक्रमों में सहभागिता ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया। मां दंतेश्वरी के प्रति श्रद्धा और बस्तर की प्राचीन परंपराओं के प्रति सम्मान के साथ राष्ट्रपति का यह प्रवास प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण रहा।

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