गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में सुरभि पांडेय को ग्रामीण प्रौद्योगिकी विषय में डॉक्टरेट उपाधि

रायपुर, 26 जुलाई 2026। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय द्वारा ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग में सुरभि पांडेय को डॉक्टरेट उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने अपना शोध कार्य डॉ. भास्कर चौरसिया के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक पूरा किया। उनके शोध का विषय ‘स्टडीज ऑन आइसोलेशन एंड आइडेंटिफिकेशन ऑफ एंडोफाइटिक फंगी एंड देयर बायोएक्टिव मॉलिक्यूल्स फ्रॉम कर्कुमा कैसिया रोबेक्स’ था। यह शोध पादप कवकों और उनके जैवसक्रिय अणुओं के पृथक्करण एवं पहचान पर केंद्रित रहा, जो ग्रामीण प्रौद्योगिकी और जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।

जांजगीर, छत्तीसगढ़ निवासी सुरभि पांडेय ने अपने प्रेजेंटेशन के दौरान बताया कि कर्कुमा कैसिया यानी काली हल्दी एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में लंबे समय से किया जाता रहा है। उनके शोध का उद्देश्य कर्कुमा कैसिया के पत्तों एवं प्रकंद से एंडोफाइटिक कवकों का पृथक्करण, उनकी पहचान तथा उनके द्वारा उत्पादित जैवसक्रिय अणुओं का अध्ययन करना था।

अध्ययन के दौरान कुल 22 एंडोफाइटिक कवकीय आइसोलेट प्राप्त किए गए। इनकी पहचान आकृतिक एवं एमएएलडीआई-टीओएफ विश्लेषण के आधार पर की गई। चयनित कवकों में एंजाइम उत्पादन और प्रतिजैविक क्षमता का भी मूल्यांकन किया गया। पौधे एवं कवकीय अर्कों का जीसी-एमएस विश्लेषण कर विभिन्न जैवसक्रिय यौगिकों की पहचान की गई।

इन यौगिकों की संभावित औषधीय उपयोगिता का आकलन एचईआर-2 प्रोटीन के विरुद्ध मॉलिक्यूलर डॉकिंग के माध्यम से किया गया, जिसमें कुछ यौगिकों ने संतोषजनक बाइंडिंग क्षमता प्रदर्शित की। शोध से यह सामने आया कि कर्कुमा कैसिया तथा उससे जुड़े एंडोफाइटिक कवक जैवसक्रिय यौगिकों के महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं। भविष्य में इनका उपयोग नई प्रतिजैविक एवं कैंसररोधी औषधियों के विकास के साथ-साथ जैव-प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है।

सुरभि की माता पुष्पा पांडेय शिक्षक हैं, जबकि पिता विजय पांडेय हैं। उन्होंने अपनी बेटी की शोध यात्रा में हमेशा सहयोग और प्रोत्साहन दिया। सुरभि के शोध प्रेजेंटेशन से पीएचडी की बाह्य परीक्षक के रूप में उपस्थित प्राध्यापक भी प्रभावित हुए और उन्होंने सुरभि को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उनके शोध को भविष्य में उपयोगी बताया।

सुरभि ने बताया कि पादप कवक और उनके जैवसक्रिय अणु चिकित्सा, कृषि और जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट संरचना, औषधीय गुणों और मेटाबोलाइट विविधता के कारण विशेष महत्व रखते हैं। एंडोफाइटिक कवक पौधों के ऊतकों के भीतर बिना किसी नुकसान के निवास करते हैं। ये कवक अल्कलॉइड, टेरपेनोइड्स और फिनोलिक यौगिकों जैसे महत्वपूर्ण जैवसक्रिय अणुओं के प्रमुख स्रोत हैं। इनसे प्राप्त यौगिकों का उपयोग भविष्य में कैंसर, संक्रमण और विभिन्न रोगों के उपचार के लिए नई औषधियों के विकास में किया जा सकता है।

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