सेबी अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने नव नियुक्त अधिकारियों से सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का किया आह्वान

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने नव नियुक्त अधिकारियों से अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और जनहित की भावना के साथ करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत के पूंजी बाजारों की मजबूती और विश्वसनीयता की सबसे महत्वपूर्ण नींव निवेशकों का विश्वास है और इस विश्वास को बनाए रखना नियामक संस्था की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

एनआईएसएम में आयोजित दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए तुहिन कांता पांडे ने नव नियुक्त अधिकारियों को उनके पेशेवर जीवन की नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सेबी की भूमिका केवल नियमों और विनियमों को लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य निवेशकों के हितों की रक्षा करना और देश के पूंजी बाजारों में लोगों के विश्वास को मजबूत बनाए रखना भी है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वित्तीय और पूंजी बाजार लगातार तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में नियामक अधिकारियों के लिए निरंतर सीखते रहना और अपने ज्ञान एवं कौशल को समय के साथ विकसित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने पेशेवर क्षमता निर्माण के लिए सेबी की ओर से संचालित समर्पित क्षमता निर्माण विभाग और शिक्षा पोर्टल का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से इन संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया।

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सेबी अध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक दौर में तकनीक नियामक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पर्यवेक्षी उपकरणों और अन्य उन्नत तकनीकों के माध्यम से पूंजी बाजारों की निगरानी और नियमन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद नियामक निर्णय लेने की प्रक्रिया में मानवीय विवेक, निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा का महत्व हमेशा सर्वोपरि रहेगा।

तुहिन कांता पांडे ने नव नियुक्त अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने प्रत्येक निर्णय और कार्रवाई में जनहित को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि नियामक के रूप में अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल नियमों के पालन को सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि बाजार की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को बनाए रखना भी है। अधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णयों का सीधा प्रभाव निवेशकों के विश्वास और पूरे वित्तीय तंत्र की स्थिरता पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक विकास और वैश्विक एकीकरण के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। ऐसे समय में देश के पूंजी बाजारों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मजबूत और विश्वसनीय पूंजी बाजार देश में निवेश को बढ़ावा देने, पूंजी जुटाने और आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

सेबी अध्यक्ष ने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाते हुए भारत के पूंजी बाजारों की विश्वसनीयता को और मजबूत करें। उन्होंने कहा कि सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और जनहित के मूल्यों को केंद्र में रखकर काम करने से न केवल निवेशकों का भरोसा कायम रहेगा, बल्कि देश के वित्तीय बाजारों को भी अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाया जा सकेगा।

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