संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक वीडियो को कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले में मेटा की कड़ी आलोचना की है। समिति ने इस मामले को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और एल्गोरिदम से जुड़ा गंभीर विषय माना है। समिति ने नई दिल्ली में मेटा के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को हटाए जाने के कारणों और कंपनी की नीतियों पर स्पष्टीकरण मांगा।
बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट को हटाया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि समिति ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग से इस मामले में माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मेटा की ओर से उचित माफी नहीं मांगी जाती है, तो कंपनी को भारत में सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 79 के तहत प्राप्त सेफ हार्बर संरक्षण पर भी विचार किया जाना चाहिए।
निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा के साथ-साथ यूट्यूब और एक्स जैसे बड़े डिजिटल मंच अपने एल्गोरिदम और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान करने में विफल रहे हैं। समिति ने इन प्लेटफॉर्मों से भारत के कानूनों के अनुरूप अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समिति अध्यक्ष ने कहा कि भारत में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, इसके बावजूद कुछ गंभीर प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री को रोकने में अपेक्षित प्रभावशीलता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने विशेष रूप से बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री और महिलाओं को प्रभावित करने वाली आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार पर चिंता जताई।
समिति का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को केवल तकनीकी प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी जिम्मेदारी से बचने के बजाय उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और कानून के पालन को प्राथमिकता देनी चाहिए। डिजिटल मंचों पर प्रसारित होने वाली सामग्री का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है, इसलिए कंटेंट मॉडरेशन की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह होना जरूरी है।
बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के एल्गोरिदम किस आधार पर सामग्री को हटाने, सीमित करने या उसकी पहुंच कम करने का निर्णय लेते हैं। समिति ने इन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, प्लेटफॉर्मों से यह अपेक्षा की गई कि वे भारत के कानूनों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियों को लागू करें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो को अस्थायी रूप से हटाए जाने का मामला अब सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और डिजिटल मंचों के नियमन को लेकर व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है। संसदीय समिति के रुख से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के कंटेंट मॉडरेशन, एल्गोरिदम और कानूनी जवाबदेही को लेकर निगरानी और सख्त हो सकती है।
