पवन हंस और नॉर्वे की नोएमी एयरोस्पेस के बीच समझौता, भारत में इलेक्ट्रिक सी-प्लेन तकनीक और हरित विमानन को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम पवन हंस लिमिटेड (पीएचएल) ने नॉर्वे की नोएमी एयरोस्पेस (एलफ्लाई एएस) के साथ अगली पीढ़ी की सतत विमानन प्रौद्योगिकियों और विद्युत चालित सी-प्लेन (सी-एयरक्राफ्ट) समाधानों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं का संयुक्त रूप से अध्ययन करने के लिए एक गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य भारत में हरित विमानन, क्षेत्रीय संपर्क और उभरती विमानन तकनीकों को नई गति देना है।

समझौता ज्ञापन पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। पवन हंस लिमिटेड की ओर से अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुनील कुमार नागदौने तथा नोएमी एयरोस्पेस (एलफ्लाई एएस) की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक फ्रांस्वा लिथुन ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

समझौते के तहत दोनों संस्थाएं विद्युत चालित सी-प्लेन प्रौद्योगिकी, तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान, कौशल विकास, क्षमता निर्माण, संयुक्त कार्यशालाओं और व्यवहार्यता अध्ययनों जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं का आकलन करेंगी। यह साझेदारी भविष्य की स्वच्छ, पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल विमानन प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने कहा कि यह सहयोग भारत की स्वदेशी विमानन क्षमताओं को मजबूत करने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल भारत में सी-प्लेन का संचालन शुरू करना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप उनका निर्माण भी भारत में ही करना है।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2026 में सी-प्लेन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। सरकार स्वदेशी सी-प्लेन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन उपलब्ध कराएगी तथा संचालन को व्यवहार्य बनाने के लिए सी-प्लेन वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना भी शुरू करेगी। उनका कहना था कि यदि वैश्विक तकनीकी विशेषज्ञता को भारत की विनिर्माण क्षमता के साथ जोड़ा जाए तो देश स्थानीय और क्षेत्रीय दोनों स्तरों पर सी-प्लेन की मांग पूरी करने में सक्षम होगा।

मंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने सी-प्लेन परिचालन को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। सी-प्लेन संचालन के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है तथा निवेशकों और हितधारकों को प्रोत्साहित करने के लिए देशभर में प्रदर्शन उड़ानें भी आयोजित की गई हैं।

नॉर्वे के बर्गेन शहर स्थित नोएमी एयरोस्पेस (एलफ्लाई एएस) अगली पीढ़ी की विद्युत चालित सी-प्लेन तकनीक विकसित करने वाली अग्रणी कंपनियों में शामिल है। कंपनी के अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम को नॉर्वे सरकार का भी वित्तीय सहयोग प्राप्त है। इससे भारत को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल विमानन तकनीकों तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा।

पवन हंस लिमिटेड ने स्पष्ट किया कि यह समझौता खोजपरक प्रकृति का है और इसमें किसी प्रकार की वित्तीय प्रतिबद्धता, निवेश, खरीद या व्यावसायिक दायित्व शामिल नहीं हैं। भविष्य में यदि कोई परियोजना या सहयोग आगे बढ़ता है तो उसके लिए अलग से औपचारिक समझौते किए जाएंगे और सभी निर्णय भारत सरकार के नियमों तथा सक्षम प्राधिकरणों की स्वीकृति के अनुरूप होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में हजारों किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा, अनेक द्वीप और बड़ी संख्या में जलाशय होने के कारण सी-प्लेन सेवाओं की व्यापक संभावनाएं हैं। यह तकनीक पर्यटन, क्षेत्रीय संपर्क, आपदा राहत और दूरदराज के क्षेत्रों तक तेज परिवहन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पवन हंस और नोएमी एयरोस्पेस के बीच यह सहयोग भारत के हरित विमानन और भविष्य की सतत हवाई परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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