नई दिल्ली, 6 अगस्त 2026/ लोकसभा ने कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के प्रभाव को कम करना, घरेलू अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सहयोग प्रदान करना है।
यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 तथा वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन का प्रावधान करता है। यह इस वर्ष 5 जून को जारी किए गए आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 का स्थान लेगा।
विधेयक में विदेशी संस्थागत निवेशकों और अंतर्राष्ट्रीय निपटान बैंक को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से प्राप्त ब्याज आय पर आयकर से छूट देने का प्रावधान किया गया है। यह छूट 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद अर्जित आय पर लागू होगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से भारत में विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और वित्तीय बाजारों में भरोसा मजबूत होगा।
कर प्रावधानों में किए गए महत्वपूर्ण बदलाव
संशोधन विधेयक के तहत आयकर अधिनियम के कुछ प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इससे पहले ब्याज आय पर 20 प्रतिशत, अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर 30 प्रतिशत और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5 प्रतिशत कर का प्रावधान था।
विधेयक में अधिसूचित विशेष क्षेत्र में कच्चे हीरों की बिक्री से कुछ विदेशी कंपनियों द्वारा अर्जित आय को कर से छूट देने का भी प्रावधान किया गया है। इससे भारत के हीरा व्यापार क्षेत्र में विदेशी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने और कारोबार को गति मिलने की संभावना है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच आर्थिक संतुलन पर जोर
सरकार ने यह संशोधन ऐसे समय में किया है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। विधेयक का उद्देश्य बाहरी आर्थिक दबावों को कम करना और भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत एवं स्थिर बनाना है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, कर प्रणाली में आवश्यक सुधारों से निवेश का माहौल बेहतर होगा और देश की आर्थिक विकास दर को गति मिलेगी। विदेशी निवेशकों के लिए कर संबंधी स्पष्टता बढ़ने से भारत को वैश्विक निवेश केंद्र के रूप में और मजबूती मिल सकती है।

डिजिटल भुगतान और वित्तीय व्यवस्था को भी मिलेगा समर्थन
कराधान सुधारों के साथ-साथ भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन से डिजिटल वित्तीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। इससे वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
लोकसभा में पारित यह विधेयक अब आगे की संसदीय प्रक्रिया के बाद कानून का रूप लेगा। सरकार ने इसे आर्थिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जिससे निवेश, व्यापार और वित्तीय स्थिरता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
