रायपुर, 7 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के विभिन्न हितग्राहियों तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ करते हुए इसके लोगो और कैटलॉग का विमोचन किया। साथ ही हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का भी शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर बुनकरों और शिल्पकारों को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 7 अगस्त 1905 को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में वर्ष 2015 से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का कोसा, बस्तर की बुनाई और प्रदेश के पारंपरिक हथकरघा उत्पाद देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के हथकरघा उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की नई पहचान दिलाना है। इसके लिए आधुनिक डिजाइन, कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, विपणन और नए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत किए गए अधिकांश वादों को राज्य सरकार ने पूरा किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना, किसानों को धान खरीदी की अंतर राशि का भुगतान, भूमिहीन कृषि मजदूरों को आर्थिक सहायता, महतारी वंदन योजना और तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए चरण पादुका योजना जैसी पहल सरकार की जनकल्याणकारी सोच को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। ई-ऑफिस व्यवस्था, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना तथा आत्मनिर्भर और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 469 आवासविहीन बुनकर परिवारों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इसी अवधि में 47 प्रदर्शनियों के माध्यम से लगभग 10 करोड़ रुपये के हथकरघा उत्पादों की बिक्री हुई। 2,001 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से विभिन्न शासकीय विभागों को 93 करोड़ रुपये के वस्त्र उपलब्ध कराए गए, जबकि बुनकरों द्वारा निर्मित 436 करोड़ रुपये के वस्त्रों की शासकीय खरीदी की गई।

राज्य सरकार हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए देश के पांच प्रमुख हवाई अड्डों पर छत्तीसगढ़ के उत्पादों के शोरूम स्थापित कर रही है। रायपुर में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल स्थानीय उत्पादों को आधुनिक विपणन मंच उपलब्ध कराएगा। नवा रायपुर में प्रदेश की पहली गारमेंट इकाई स्थापित की जा रही है, जिससे 4,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। निफ्ट की स्थापना से युवाओं को डिजाइन और टेक्सटाइल क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश में लगभग 1 लाख 20 हजार परिवार हथकरघा और इससे संबंधित गतिविधियों से जुड़े हैं। उन्होंने नागरिकों से हर वर्ष कम से कम एक हथकरघा उत्पाद खरीदने की अपील की। ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव ने स्वदेशी आंदोलन की विरासत को याद करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ी की देशभर में विशिष्ट पहचान है।

मुख्यमंत्री ने स्वदेशी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ, बिलासा हैंडलूम, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, सबरी एम्पोरियम तथा माटीकला बोर्ड के स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने कारीगरों से संवाद किया और हथकरघा स्टॉल से स्वयं तत्काल भुगतान कर कोसा साड़ी खरीदी। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद बुनकरों और शिल्पकारों के श्रम एवं कौशल का सबसे बड़ा सम्मान है।
कार्यक्रम में बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं द्वारा किया गया रैंप वॉक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। महिलाओं ने पारंपरिक कोसा सिल्क और अन्य हथकरघा परिधानों का प्रदर्शन किया। यह प्रस्तुति मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ती महिलाओं के आत्मविश्वास और बदलते बस्तर की सकारात्मक तस्वीर का प्रतीक बनी। मुख्यमंत्री ने उनसे आत्मीय संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया।
‘कोशल फैब’ ब्रांड को ‘लूम टू लग्जरी’ की अवधारणा पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाना है। हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर से उत्पादों के भंडारण, प्रबंधन, विपणन और वितरण को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत बुनकरों की डायरेक्टरी तथा टाई-डाई और बांधनी रंगाई विषयक पुस्तक का विमोचन किया गया। जशपुर जिले के गोरिया में स्थापित होने वाली ग्लेजिंग यूनिट का शुभारंभ भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने कक्षा 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 935 छात्र-छात्राओं को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा 17 वरिष्ठ बुनकरों को सम्मान राशि प्रदान की। 49 बुनकरों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण हेतु 1.22 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति, पांच बुनकर सहकारी समितियों को भवन निर्माण के लिए 75 लाख रुपये की सहायता और 85 बुनकरों को उन्नत करघे एवं सहायक उपकरण वितरित किए गए। रेशम कृषकों, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के हितग्राहियों, शिल्पकारों और माटी शिल्पियों को भी विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता प्रदान की गई।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर उत्कृष्ट बुनकरों को राज्य स्तरीय स्वर्गीय बिसाहूदास महंत सर्वश्रेष्ठ बुनकर पुरस्कार तथा राजराजेश्वरी करुणामाता हथकरघा प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पाद अपनाने और ‘सेल्फी विद स्वदेशी’ अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद से बुनकरों, शिल्पकारों और कारीगरों की आजीविका मजबूत होती है और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को गति मिलती है।
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