भारत और विश्व बैंक ने पारंपरिक ऋण से आगे साझेदारी विस्तार पर किया विचार, निजी पूंजी जुटाने और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर जोर

ऐशविले, 2 सितंबर 2026। भारत और विश्व बैंक ने पारंपरिक ऋण व्यवस्था से आगे बढ़कर विकास और वित्तपोषण के नए क्षेत्रों में साझेदारी को व्यापक बनाने पर चर्चा की है। अमेरिका के ऐशविले में जी-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा से मुलाकात की। बैठक में भारत के विकास लक्ष्यों के अनुरूप विश्व बैंक के वित्तीय साधनों और विशेषज्ञता के अधिक प्रभावी इस्तेमाल पर विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में अवसंरचना वित्तपोषण, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, पर्यटन क्षेत्र और निजी पूंजी जुटाने जैसे क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं के लिए केवल पारंपरिक सार्वजनिक वित्तपोषण पर निर्भर रहने के बजाय निजी निवेश को भी व्यापक स्तर पर आकर्षित करना आवश्यक है।

वित्त मंत्री और विश्व बैंक अध्यक्ष के बीच भारत में बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी की भूमिका को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावित सहयोग के तहत गारंटी तंत्र का व्यवस्थित और व्यापक उपयोग कर निजी क्षेत्र से अधिक पूंजी जुटाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इसका उद्देश्य भारत के कॉर्पोरेट, बुनियादी ढांचा और नगरपालिका बॉन्ड बाजारों को मजबूत बनाना है।

गारंटी आधारित वित्तीय व्यवस्था से निवेशकों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे ऐसी विकास परियोजनाओं में निजी पूंजी आकर्षित करने की संभावना बढ़ती है, जिनमें बड़े निवेश की जरूरत होती है और जिनमें लंबी अवधि में आर्थिक एवं सामाजिक लाभ मिलने की उम्मीद रहती है।

भारत और विश्व बैंक ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं और अनुभव का व्यापक विस्तार किया है। दोनों पक्षों के बीच चर्चा में इस अनुभव को विकास परियोजनाओं और अन्य देशों के साथ सहयोग के लिए उपयोग करने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया गया।

पर्यटन को भी साझेदारी के संभावित प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया। भारत में पर्यटन अवसंरचना, कनेक्टिविटी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निवेश बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए विश्व बैंक के वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया। पर्यटन क्षेत्र में निवेश से रोजगार सृजन और छोटे कारोबारों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बैठक में भारत और विश्व बैंक की मौजूदा साझेदारी को और मजबूत करने के साथ संस्था के विभिन्न वित्तपोषण साधनों का दायरा बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई। भारत का जोर ऐसे वित्तीय मॉडल विकसित करने पर है, जिनसे विकास परियोजनाओं के लिए अधिक संसाधन जुटाए जा सकें और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जा सके।

भारत और विश्व बैंक के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था को विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण, जोखिम कम करने वाले तंत्र और निजी निवेश को आकर्षित करने वाली व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हो गई हैं।

बैठक से यह संकेत मिलता है कि भारत विश्व बैंक के साथ अपने संबंधों को केवल ऋण प्राप्त करने तक सीमित रखने के बजाय वित्तीय नवाचार, निवेश जुटाने, तकनीकी सहयोग और विकास के नए क्षेत्रों तक विस्तारित करना चाहता है। इससे भारत की दीर्घकालिक अवसंरचना जरूरतों और विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है।

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