ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम शिक्षा दृष्टिकोण को दोहराया, भुवनेश्वर घोषणा को मिली मंजूरी

भुवनेश्वर। 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक का आयोजन ओडिशा के भुवनेश्वर में किया गया, जिसमें ब्रिक्स देशों ने शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए नवाचार आधारित शिक्षा प्रणाली विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक का समापन 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा को अपनाए जाने के साथ हुआ।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत ब्रिक्स सहयोग के प्रति जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में शिक्षा प्रणालियों का निरंतर विकास आवश्यक है, ताकि युवा पीढ़ी उभरते अवसरों के लिए तैयार हो सके और मानवीय मूल्यों से जुड़ी रहे।

उन्होंने कहा कि भारत की वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता का निर्माण” शिक्षा क्षेत्र में साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने का मार्गदर्शन कर रही है। शिक्षा को समावेशी विकास और साझा समृद्धि की आधारशिला बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और युवाओं को नीति निर्माण एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग के केंद्र में रखा जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने पारंपरिक और देशज ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण एवं संवर्धन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नवाचार और विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं तथा ब्रिक्स देशों की समृद्ध सभ्यतागत परंपराएं भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उन्होंने ओडिशा की प्राचीन शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए भारत के शाश्वत मूल्यों “अतिथि देवो भव:” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सभी देशों की परंपराएं और अनुभव अलग हो सकते हैं, लेकिन उनकी प्रगति एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।

बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर साझा कार्ययोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।

पहले क्षेत्र के तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा तथा बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने और डिजिटल समाधानों के उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।

दूसरे क्षेत्र में कौशल विकास और तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया। ब्रिक्स तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण सहयोग गठबंधन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सतत कौशल विकास पहलों को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया।

तीसरे क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा हुई। शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित, नैतिक और मानव-केंद्रित उपयोग को बढ़ावा देने तथा उच्च शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

चौथे क्षेत्र के तहत शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता को आगे बढ़ाने के लिए कार्य समूह की बैठकों के आयोजन पर सहमति व्यक्त की गई। इससे छात्रों और शिक्षाविदों की अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा।

पांचवें क्षेत्र में शैक्षणिक नेतृत्व और संस्थागत विकास के लिए क्षमता निर्माण को मजबूत करने पर जोर दिया गया। ब्रिक्स रेक्टर्स फोरम, छात्रवृत्ति कार्यक्रमों, संकाय आदान-प्रदान और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित (स्टेम) शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाने पर चर्चा हुई।

बैठक में पारंपरिक एवं देशज ज्ञान प्रणालियों पर शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की पहल का स्वागत किया गया। ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालयों में इन विषयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की संभावना पर भी विचार किया गया।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 5 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में तीसरी ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी आयोजित की गई थी। इसमें शिक्षा क्षेत्र में अधिक सहयोग, नवाचार और ज्ञान साझा करने के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणालियों के निर्माण की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

भारत वर्ष 2026 में अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में मंत्रिस्तरीय बैठकों की मेजबानी करेगा, जिसका समापन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ होगा।

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