बीजापुर। बीजापुर में नक्सलवाद की धुंध छंटने के साथ अब इको-टूरिज्म को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ती नजर आ रही है। लंबे समय तक सुरक्षा कारणों से अनदेखे रहे प्राकृतिक स्थलों की ओर अब पर्यटकों का रुझान बढ़ रहा है। इसी कड़ी में जिले के प्रसिद्ध नंबी जलप्रपात में 8 और 9 अगस्त को दो दिवसीय कैंपिंग एवं ट्रेकिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रायपुर की संस्था नंबी धारा समिति के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में रायपुर, दुर्ग, कोरबा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब 20 पर्यटक शामिल हुए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नंबी जलप्रपात की प्राकृतिक सुंदरता को लोगों तक पहुंचाना, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्थानीय लोगों को पर्यटन से जोड़ना रहा। दो दिनों तक पर्यटकों ने नंबी जलप्रपात, आसपास के जंगलों और प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण किया। उन्होंने ट्रेकिंग और कैंपिंग का आनंद लिया तथा क्षेत्र की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को करीब से जाना।
अरोरा स्टोरिजम के संस्थापक डॉ. आलोक कुमार साहू के मार्गदर्शन में यह पहल की गई। संस्था लंबे समय से छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। बीजापुर के निवासी रिशभ भी इस पहल से जुड़े हैं और जिले में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में नंबी धारा समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति ने स्थानीय लोगों को आयोजन से जोड़ने का प्रयास किया, ताकि भविष्य में पर्यटन के माध्यम से गांवों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो सकें। स्थानीय युवाओं को गाइड, कैंपिंग सहयोगी, परिवहन, भोजन व्यवस्था, होमस्टे और अन्य सेवाओं से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
पर्यटकों ने नंबी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना करते हुए कहा कि बीजापुर में कई ऐसे प्राकृतिक स्थल हैं, जिनकी जानकारी अभी बहुत कम लोगों तक पहुंच पाई है। यदि इन स्थलों का व्यवस्थित विकास और प्रचार-प्रसार किया जाए तो यह क्षेत्र राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।
आयोजन के दौरान पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों को प्लास्टिक का उपयोग कम करने, कचरा इधर-उधर नहीं फेंकने और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। आयोजकों ने बताया कि पर्यटन का विकास प्रकृति और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन प्राकृतिक धरोहरों का आनंद ले सकें।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के आयोजन बीजापुर की सकारात्मक पहचान बनाने में मदद करेंगे। साथ ही जिले के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते भी खोलेंगे। नंबी जलप्रपात में आयोजित यह कार्यक्रम बीजापुर में पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
