राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किए, छत्तीसगढ़ के अनूप रंजन पांडेय भी सम्मानित

नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में वर्ष 2024 और 2025 के लिए प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर देशभर के विभिन्न कला क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ के लोक संगीत क्षेत्र के कलाकार अनूप रंजन पांडेय को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया, जो प्रदेश की लोक कला और सांस्कृतिक परंपरा के लिए गौरव का विषय है।

राष्ट्रपति ने सम्मानित कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय परंपरा के वाहक हमारे कलाकार देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की कल्पना के सृजक हैं। उन्होंने कहा कि आज सम्मानित कलाकार मिलकर भारत का ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र प्रस्तुत करते हैं, जिसमें देश की मिट्टी की कथाएं और गीत, विविधता से भरी धरती के नृत्य और उत्सव तथा सदियों से विकसित भाषाओं और बोलियों की स्मृतियां समाहित हैं।

छत्तीसगढ़ की लोक संगीत परंपरा को राष्ट्रीय सम्मान

अनूप रंजन पांडेय को लोक संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मिला यह सम्मान छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक सांस्कृतिक परंपरा की राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करता है। छत्तीसगढ़ की लोककलाओं में यहां की जीवनशैली, लोकविश्वास, प्रकृति, परंपराएं और सामुदायिक स्मृतियां गहराई से अभिव्यक्त होती हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की संस्कृति अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है। अलग-अलग खान-पान, वेशभूषा, नृत्य और संगीत प्रकृति से प्रेरित हैं। पक्षियों की चहचहाहट, झरनों की कल-कल, पेड़-पत्तों, बादलों और नदियों से प्रेरणा लेकर कलाकार अपनी कला को अभिव्यक्ति देते हैं। विविधता और एकता का यह संगम भारतीय कलाओं की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है।

गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण पर जोर

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सभी प्रमुख कला शैलियों में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हमारी कलाओं की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक जीवंत गुरु ही होते हैं। तेजी से बदलते समय में कई लोककलाओं के सामने विलुप्त होने का संकट है। ऐसे में केवल कला विधाओं का दस्तावेजीकरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जीवंत बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास भी आवश्यक हैं।

उन्होंने संगीत नाटक अकादमी द्वारा ‘कला-दीक्षा’ कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और वरिष्ठ कलाकारों से अगली पीढ़ी को तैयार करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्रयास करने का आह्वान किया।

लोक और जनजातीय कलाएं सांस्कृतिक पहचान का आधार

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रकृति कला के संस्कार और समझ के लिए सबसे सहज प्रशिक्षण संस्थान है। लोक और जनजातीय कलाओं में जीवन का स्वाभाविक उल्लास और प्रकृति के साथ गहरा संवाद दिखाई देता है। इन कला रूपों में समुदाय की स्मृति और सामूहिक चेतना सहज रूप से व्यक्त होती है। इसलिए लोक कलाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार हैं।

उन्होंने संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि कलाकार देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए परंपराओं को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने संगीत नाटक अकादमी को भारत की सॉफ्ट पावर का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि अकादमी भविष्य में भी भारत की सांस्कृतिक ऊर्जा को पूरी दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।

छत्तीसगढ़ के अनूप रंजन पांडेय का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्रदेश की लोक संगीत परंपरा के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है।

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