भारत के निर्यात में तेज उछाल, अप्रैल-जुलाई में कुल निर्यात 13.16 प्रतिशत बढ़कर 316.42 अरब डॉलर पहुंचा

नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026। भारत के विदेश व्यापार में चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान वस्तु और सेवाओं को मिलाकर भारत का संचयी निर्यात 316.42 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 279.63 अरब डॉलर था। इस तरह कुल निर्यात में 13.16 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है।

इस अवधि में कुल आयात 365.85 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो अप्रैल-जुलाई 2025-26 के 311.94 अरब डॉलर की तुलना में 17.28 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान कुल व्यापार घाटा 49.43 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 32.32 अरब डॉलर था।

जुलाई में कुल निर्यात 80.14 अरब डॉलर

जुलाई 2026 के दौरान भारत का कुल निर्यात 80.14 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो जुलाई 2025 के 70.72 अरब डॉलर की तुलना में 13.31 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में कुल आयात 95.16 अरब डॉलर रहा, जबकि जुलाई 2025 में यह 82.16 अरब डॉलर था। जुलाई में कुल व्यापार घाटा 15.03 अरब डॉलर रहा।

जुलाई में वस्तु निर्यात 44.24 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के 36.98 अरब डॉलर की तुलना में 19.63 प्रतिशत अधिक है। वस्तु आयात भी बढ़कर 76.22 अरब डॉलर हो गया, जबकि जुलाई 2025 में यह 64.86 अरब डॉलर था।

वस्तु निर्यात में 17.04 प्रतिशत की वृद्धि

अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान वस्तु निर्यात 173.78 अरब डॉलर रहा, जबकि अप्रैल-जुलाई 2025-26 में यह 148.48 अरब डॉलर था। इस तरह वस्तु निर्यात में 17.04 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दूसरी ओर, वस्तु आयात 245.14 अरब डॉलर से बढ़कर 292.38 अरब डॉलर हो गया। इस अवधि में वस्तु व्यापार घाटा 118.60 अरब डॉलर रहा।

गैर-पेट्रोलियम निर्यात भी मजबूत रहा। अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान गैर-पेट्रोलियम निर्यात 143.61 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 127.32 अरब डॉलर की तुलना में 12.79 प्रतिशत अधिक है।

पेट्रोलियम और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं ने बढ़ाया निर्यात

जुलाई 2026 में निर्यात वृद्धि में कई प्रमुख क्षेत्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात जुलाई 2025 के 4.13 अरब डॉलर से बढ़कर 6.92 अरब डॉलर हो गया, जिसमें 67.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्यात 3.76 अरब डॉलर से बढ़कर 5.92 अरब डॉलर पहुंच गया, जो 57.40 प्रतिशत की वृद्धि है। इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात भी 10.40 अरब डॉलर से बढ़कर 12.24 अरब डॉलर रहा और इसमें 17.71 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

जैविक एवं अकार्बनिक रसायनों का निर्यात 14.39 प्रतिशत बढ़कर 2.80 अरब डॉलर हो गया। सूती धागे, वस्त्र, तैयार उत्पाद और हथकरघा उत्पादों का निर्यात 8.40 प्रतिशत बढ़कर 1.11 अरब डॉलर रहा।

इसके अलावा लौह अयस्क के निर्यात में 78.35 प्रतिशत, मांस, डेयरी एवं पोल्ट्री उत्पादों में 40.84 प्रतिशत, काजू में 25.11 प्रतिशत और समुद्री उत्पादों में 17.83 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

सेवा निर्यात में भी सकारात्मक रुख

अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान सेवा निर्यात 142.64 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 131.15 अरब डॉलर था। इस तरह सेवा निर्यात में 6.38 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। सेवा आयात 73.47 अरब डॉलर रहा। इस अवधि में सेवा व्यापार अधिशेष 69.17 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के 64.35 अरब डॉलर से अधिक है।

अमेरिका, चीन और सिंगापुर प्रमुख निर्यात गंतव्य

जुलाई 2026 में पिछले वर्ष की तुलना में भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्यों में अमेरिका को निर्यात में 12.85 प्रतिशत, चीन में 64.57 प्रतिशत, सिंगापुर में 83.70 प्रतिशत, केन्या में 151.41 प्रतिशत और मलेशिया में 73.03 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान सिंगापुर को निर्यात में 97.11 प्रतिशत, चीन में 35.97 प्रतिशत, तंजानिया में 131.20 प्रतिशत, दक्षिण अफ्रीका में 69.75 प्रतिशत और श्रीलंका में 111.76 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

रूस, चीन और ओमान से आयात में तेजी

जुलाई 2026 में रूस से आयात 83.85 प्रतिशत, चीन से 34.42 प्रतिशत, ओमान से 150.36 प्रतिशत, ताइवान से 111.30 प्रतिशत और अमेरिका से 18.11 प्रतिशत बढ़ा। अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान रूस से आयात में 59.65 प्रतिशत, चीन से 29.68 प्रतिशत, ओमान से 200.68 प्रतिशत, अमेरिका से 22.42 प्रतिशत और ब्राजील से 166.84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम, इंजीनियरिंग, रसायन, कृषि एवं समुद्री उत्पादों सहित कई क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन ने भारत के निर्यात को गति दी है। वैश्विक व्यापार में चुनौतियों के बीच निर्यात में यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।


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