नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026। पृथ्वी की निचली कक्षा में तेजी से बढ़ रही उपग्रहों की संख्या के साथ अंतरिक्ष मलबे की चुनौती भी गंभीर होती जा रही है। भारत इस चुनौती से पूरी तरह अवगत है और अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा तथा भविष्य में मलबे के निर्माण को रोकने के लिए कई स्तरों पर काम कर रहा है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन निम्न पृथ्वी कक्षा में उपग्रह तारामंडलों और सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क की बढ़ती संख्या के कारण पैदा हो रहे अंतरिक्ष मलबे के खतरे को कम करने और इसकी रोकथाम के लिए सभी संभव उपाय कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसरो का ‘मलबामुक्त अंतरिक्ष मिशन’ अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा, सक्रिय मलबा हटाने और भविष्य में मलबे के निर्माण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
हजारों उपग्रहों से बढ़ रहा टकराव का जोखिम
डॉ. सिंह के अनुसार, इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने वाले सैटेलाइट तारामंडलों में सामान्यतः हजारों उपग्रह शामिल होते हैं। इनके कारण संबंधित कक्षीय क्षेत्रों में उपग्रहों के बीच टकराव की संभावना बढ़ जाती है। कई बड़े उपग्रह तारामंडलों में स्वचालित टकराव बचाव प्रणाली मौजूद है, लेकिन कक्षा में किसी उपग्रह के खराब हो जाने पर वह अपनी दिशा बदलने में सक्षम नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में टकराव का खतरा और गंभीर हो सकता है।
उन्होंने बताया कि छोटे आकार का ऐसा मलबा, जिसे वर्तमान प्रणालियों से ट्रैक करना संभव नहीं होता, अंतरिक्ष अभियानों के लिए विशेष चुनौती है। ऐसे मलबे से टकराव की पहले से चेतावनी मिलना कठिन होता है और पर्याप्त सुरक्षा कवच बनाना भी संभव नहीं होता। किसी छोटे मलबे से टकराव के कारण पूरा मिशन विफल हो सकता है और क्षतिग्रस्त उपग्रह स्वयं अतिरिक्त मलबे का स्रोत बन सकता है।
बड़ी संख्या में उपग्रहों की मौजूदगी के कारण यह खतरा और बढ़ जाता है। किसी अधिक आबादी वाले कक्षीय क्षेत्र में टक्कर या उपग्रह के अचानक टूटने से बड़ी संख्या में टुकड़े अलग हो सकते हैं, जिससे दूसरे उपग्रहों और अंतरिक्ष अभियानों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी
अंतरिक्ष मलबे की निगरानी और उसके शमन के क्षेत्र में भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का हिस्सा रहा है। डॉ. सिंह ने बताया कि 1993 में गठित अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति अंतरिक्ष मलबे की निगरानी और शमन से संबंधित मामलों पर काम करने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था है। इसरो वर्ष 1996 से इस समिति का सदस्य है।
उन्होंने बताया कि बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र समिति भी अंतरिक्ष मलबे को कम करने और दीर्घकालिक अंतरिक्ष स्थिरता सुनिश्चित करने से जुड़े विषयों पर काम करती है। भारत अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति, संयुक्त राष्ट्र वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपसमिति के दीर्घकालिक स्थिरता संबंधी कार्य समूह और अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता से जुड़े विशेषज्ञ समूहों में सक्रिय रूप से भाग लेता है।
उपग्रहों के जीवनकाल के बाद निपटान पर जोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष नीति के तहत अंतरिक्ष मलबे को कम करने से संबंधित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त दिशा-निर्देशों को अपनाना आवश्यक है। इसमें उपग्रहों के जीवनकाल की समाप्ति के बाद उनके उचित निपटान से जुड़े उपाय भी शामिल हैं।
इसरो के नेतृत्व में शुरू किया गया ‘डेब्रिस फ्री स्पेस मिशन’ उपग्रहों के जीवनकाल के अंत में सुरक्षित निपटान से जुड़े दिशा-निर्देशों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। वर्ष 2024 में इन-स्पेस द्वारा जारी मानकों, दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं के तहत भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को मिशन के बाद पर्याप्त निपटान उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि अंतरिक्ष परिसंपत्तियों का कक्षीय जीवन प्राकृतिक क्षय के कारण निर्धारित अवधि के बाद कम हो।
अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता होगी महत्वपूर्ण
डॉ. सिंह ने अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता को दीर्घकालिक अंतरिक्ष स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उपग्रह संचालकों को दिशा बदलने और उपग्रहों को ट्रैक किए जाने योग्य बनाने जैसी तकनीकी आवश्यकताओं का पालन करना होगा। इसके अलावा उपग्रहों का पंजीकरण और संपर्क संबंधी जानकारी साझा करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मलबा शमन उपायों को व्यापक स्तर पर लागू करने और ‘मलबामुक्त अंतरिक्ष मिशन’ के प्रावधानों का बेहतर पालन करने से अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा मजबूत होगी तथा नए मलबे के निर्माण को रोका जा सकेगा।

सक्रिय मलबा हटाने पर भी काम
केंद्रीय मंत्री ने सक्रिय मलबा हटाने की तकनीक के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि सक्रिय मलबा हटाने की दिशा में शुरुआती गतिविधियां शुरू की जा चुकी हैं और आने वाले समय में इन क्षमताओं को और बेहतर बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, डेटा साझा करना और घरेलू निगरानी क्षमताओं का विकास समान रूप से आवश्यक है। भारत अंतरिक्ष निगरानी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर क्षमता विकसित करने के साथ नई तकनीकों, अनुसंधान एवं विकास पर भी जोर दे रहा है। अंतरिक्ष के उपयोग योग्य क्षेत्रों की संवेदनशीलता के प्रति सभी अंतरिक्ष हितधारकों में जागरूकता बढ़ाना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
