रायपुर, 14 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी में सामने आए 21 वर्ष पुराने चावल घोटाले के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। वर्ष 2005 में दर्ज इस बहुचर्चित प्रकरण की लंबी विवेचना के बाद तत्कालीन गोदाम प्रभारी सुनील कुमार निगम और परिवहनकर्ता विमल कुमार गर्ग के विरुद्ध जशपुर स्थित विशेष न्यायालय में करीब 40,000 पृष्ठों का अभियोग-पत्र प्रस्तुत किया गया है। विवेचना में कुनकुरी गोदाम में 22,198.52 क्विंटल चावल की वास्तविक कमी सामने आई है। इस कमी से शासन को 2 करोड़ 50 लाख 55 हजार 555 रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति होना पाया गया है।
यह मामला छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम की कुनकुरी शाखा के गोदाम में भंडारित चावल के स्टॉक में अनियमितता से जुड़ा है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा खाद्य विभाग की संक्षेपिका के आधार पर अपराध पंजीबद्ध करने के लिए राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, रायपुर को पत्र भेजा गया था। इसके बाद कुनकुरी गोदाम का प्रारंभिक निरीक्षण और स्टॉक सत्यापन कराया गया।
जांच के दौरान गोदाम में वास्तव में उपलब्ध चावल और विभिन्न पंजियों एवं अभिलेखों में दर्ज स्टॉक के बीच गंभीर अंतर सामने आया। अपराध दर्ज किए जाने के समय उपलब्ध विभागीय जानकारी में करीब 26,626.42 क्विंटल चावल की प्रारंभिक कमी बताई गई थी। विस्तृत विवेचना, स्टॉक अभिलेखों की जांच और अन्य साक्ष्यों के परीक्षण के बाद वास्तविक कमी 22,198.52 क्विंटल निर्धारित की गई।
मामले में 30 सितंबर 2005 को अपराध क्रमांक 01/2005 दर्ज किया गया था। इसमें तत्कालीन शाखा प्रबंधक एवं गोदाम प्रभारी सुनील कुमार निगम तथा अन्य के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई थी।
विवेचना के दौरान जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन गोदाम प्रभारी सुनील कुमार निगम और तत्कालीन गोदाम प्रभारी, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम, कुनकुरी शाखा के शिव शंकर वैष्णव ने परिवहनकर्ता विमल कुमार गर्ग के साथ आपसी सहमति और आपराधिक षड्यंत्र के तहत वास्तविक स्टॉक की स्थिति से अलग दस्तावेज और अभिलेख तैयार अथवा संधारित किए। इन अभिलेखों का वास्तविक और वैध रिकॉर्ड के रूप में उपयोग किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
जांच के अनुसार गोदाम में भंडारित खाद्यान्न पर सुनील कुमार निगम और शिव शंकर वैष्णव का पदीय नियंत्रण एवं प्रभुत्व था। वहीं परिवहनकर्ता विमल कुमार गर्ग की प्रत्यक्ष भूमिका 18 डिलीवरी ऑर्डरों के तहत 310.13 क्विंटल चावल के परिवहन और कथित वितरण से संबंधित पाई गई है।
विवेचना में यह भी सामने आया कि शासकीय खाद्यान्न स्टॉक में कमी और संबंधित अभिलेखों में कथित हेरफेर के कारण शासन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। जांच एजेंसी के अनुसार धोखाधड़ी और आपराधिक न्यासभंग के कारण कुल 2,50,55,555.94 रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
मामले में नामजद आरोपियों में तत्कालीन शाखा प्रबंधक एवं गोदाम प्रभारी सुनील कुमार निगम और परिवहनकर्ता विमल कुमार गर्ग उर्फ बिल्लू शामिल हैं। वहीं मामले में जांच के दौरान नाम सामने आए शिव शंकर वैष्णव की मृत्यु हो चुकी है।

लंबे समय से लंबित इस प्रकरण में करीब 40 हजार पृष्ठों का अभियोग-पत्र न्यायालय में पेश किया जाना जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, जिला जशपुर में चलेगी। आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर होगा।
