रायपुर, 14 अगस्त 2026। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता भागीरथी वर्मा उर्फ भागीरथ वर्मा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। वर्ष 2019 से 2023 के बीच मुख्य अभियंता के पद पर रहते हुए पद के कथित दुरुपयोग और अवैध कमीशन के आरोपों से जुड़े मामले में ईओडब्ल्यू ने रायपुर स्थित विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में करीब 1500 पृष्ठों का अभियोग-पत्र प्रस्तुत किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2019 से 2021-22 के दौरान भागीरथी वर्मा को कथित रूप से 1 करोड़ 68 लाख 52 हजार रुपये नकद और 7 लाख 77 हजार 582 रुपये की मूल्यवान सामग्री सहित कुल 1 करोड़ 76 लाख 29 हजार 582 रुपये का असम्यक लाभ प्राप्त हुआ।
मामला विभिन्न नगरीय निकायों में निविदा कार्य आवंटित कराने और कार्यों के बिलों का भुगतान कराने के एवज में कथित रूप से 25 प्रतिशत अवैध कमीशन की मांग किए जाने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता राघवेन्द्र तिवारी ने भागीरथी वर्मा के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, रायपुर में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू ने 15 जून 2026 को अपराध क्रमांक 28/2026 दर्ज किया। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 एवं 11 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई। जांच के दौरान ईओडब्ल्यू ने रायपुर और बिलासपुर में छह तथा मध्यप्रदेश के उज्जैन में दो स्थानों सहित कुल आठ ठिकानों पर रेड कार्रवाई की। इस दौरान मामले से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और कथित अवैध आय से अर्जित संपत्तियों से जुड़े अभिलेख बरामद किए गए।
विवेचना में शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट, बैंक खातों का विश्लेषण, लेनदेन का विवरण, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के बयानों की जांच की गई। ईओडब्ल्यू के अनुसार, इन साक्ष्यों से विभिन्न नगरीय निकायों में निविदा कार्य दिलाने और बिलों का भुगतान कराने के एवज में नकद राशि तथा मूल्यवान सामग्री के रूप में कथित लाभ प्राप्त किए जाने की जानकारी सामने आई।
जांच के अनुसार, वर्ष 2019 में भागीरथी वर्मा को कथित रूप से 32 लाख 65 हजार रुपये नकद और करीब 40 हजार 250 रुपये मूल्य की दो हीरे की अंगूठियां दी गईं। वर्ष 2019-20 में उनके आवास के लिए करीब 3 लाख 39 हजार 862 रुपये के टाइल्स और ग्रेनाइट उपलब्ध कराए जाने का भी जांच में उल्लेख है।
वर्ष 2020 से जुड़े लेनदेन की जांच में अलग-अलग बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से रकम ट्रांसफर किए जाने की कड़ी भी सामने आई। ईओडब्ल्यू के अनुसार, आरोपी के निर्देश पर विभिन्न खातों में कुल 2.10 लाख रुपये के बैंक एवं डिजिटल ट्रांसफर किए गए। इन लेनदेन के संबंध में बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और संबंधित लोगों के बयान जांच में शामिल किए गए हैं।
विवेचना में वर्ष 2021-22 के दौरान जैजेपुर, पुसौर, भोपालपट्टनम, नरहरपुर और कोंटा नगरीय निकायों में हाईमास्ट एलईडी लाइट लगाने के लिए स्वीकृत करीब 1.46 करोड़ रुपये के कार्यों की भी जांच की गई। शिकायतकर्ता की फर्म द्वारा कोंटा, नरहरपुर और जैजेपुर में कार्य किए जाने की जानकारी सामने आई। जांच एजेंसी के अनुसार, इन कार्यों और पूर्व में किए गए एलईडी लाइट के कार्यों के एवज में पांच एसी और दो स्मार्ट पंखों की मांग किए जाने का आरोप है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, करीब 1 लाख 72 हजार रुपये के पांच एसी, 15 हजार 850 रुपये के दो स्मार्ट पंखे और लगभग 1 लाख 40 हजार 220 रुपये की एलईडी लाइट आरोपी के रायपुर स्थित आवास पर पहुंचाई गई। इसके अलावा विभिन्न तिथियों में कथित रूप से 93 लाख 22 हजार रुपये नकद तथा दीपावली के समय करीब 69 हजार 400 रुपये मूल्य की दो सोने की अंगूठियां दिए जाने की बात भी विवेचना में सामने आई है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, निरीक्षण के दौरान आरोपी के अग्रोहा कॉलोनी स्थित आवास पर लॉयड कंपनी के एसी और टाइल्स लगे हुए तथा उसके आधिपत्य में पाए गए। सभी उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेनदेन और गवाहों के बयानों के परीक्षण के बाद जांच एजेंसी ने भागीरथी वर्मा के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने का दावा किया है।
भागीरथी वर्मा को 17 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था और वह वर्तमान में केंद्रीय जेल रायपुर में निरुद्ध है। अब ईओडब्ल्यू ने उनके खिलाफ करीब 1500 पृष्ठों का अभियोग-पत्र विशेष न्यायालय में पेश किया है।

ईओडब्ल्यू के मुताबिक कथित अवैध राशि आगे किन लोगों तक पहुंचाई गई, संबंधित कार्य किन अधिकारियों अथवा व्यक्तियों के माध्यम से स्वीकृत कराए गए और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच अभी जारी है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में होने वाली सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।
