कोरबा की गेवरा खदान में देश की पहली 21 क्यूबिक मीटर इलेक्ट्रो-हाइड्रोलिक फेस शॉवेल शुरू, बढ़ेगी खनन की रफ्तार

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित एसईसीएल की गेवरा मेगा परियोजना ने आधुनिक कोयला खनन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गेवरा खदान में देश की पहली 21 क्यूबिक मीटर क्षमता वाली इलेक्ट्रो-हाइड्रोलिक फेस शॉवेल मशीन का परिचालन शुरू कर दिया गया है। अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस मशीन से कोयला लोडिंग की क्षमता बढ़ने के साथ खनन कार्य में दक्षता और सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के महाप्रबंधक संजय कुमार मिश्रा के मुताबिक, गेवरा परियोजना देश और दुनिया की प्रमुख कोयला उत्पादक खदानों में शामिल है। बढ़ते उत्पादन लक्ष्यों को देखते हुए आधुनिक तकनीक को अपनाना जरूरी है। इसी दिशा में 21 क्यूबिक मीटर क्षमता वाली नई फेस शॉवेल को खदान में शामिल किया गया है।

नई मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी अधिक क्षमता और तेज लोडिंग है। ऑपरेटर पदुमनाथ राठौर ने बताया कि पहले 16 क्यूबिक मीटर क्षमता वाली शॉवेल से एक डंपर को लोड करने में करीब 3 से 4 मिनट लगते थे। नई मशीन के इस्तेमाल से लोडिंग का समय लगभग आधा हो गया है। इससे कम समय में अधिक मात्रा में कोयला लोड किया जा सकेगा।

मशीन में रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं भी मौजूद हैं, जिससे परिचालन पर बेहतर निगरानी रखने में मदद मिलेगी। साथ ही ऑपरेटरों के लिए सुरक्षा और कार्य सुविधा को भी पहले की तुलना में बेहतर बनाया गया है।

गेवरा खदान में 21 क्यूबिक मीटर इलेक्ट्रो-हाइड्रोलिक फेस शॉवेल का संचालन एसईसीएल के तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है। अधिक क्षमता, तेज लोडिंग, बेहतर मॉनिटरिंग और सुरक्षित संचालन के जरिए यह मशीन गेवरा परियोजना के उत्पादन और परिचालन दक्षता को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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