नेपाल में भीषण बाढ़ से मृतकों की संख्या 794 पहुंची, 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता; हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश तेज

काठमांडू, 31 अगस्त 2026। नेपाल में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार तेज किया जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर 794 हो गई है, जबकि 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है और बचाव अभियान जारी रहने के साथ मृतकों तथा लापता लोगों की संख्या बदल सकती है।

सबसे बड़ी चिंता नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को लेकर है। बाढ़ के पानी और मलबे के कारण त्रिशुली-3ए समेत कई पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों में बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। भारतीय और चीनी विशेषज्ञों समेत विभिन्न बचाव दल सुरंगों तक पहुंचने और अंदर फंसे लोगों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कई स्थानों पर अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंगों में जमा भारी मलबा, लगातार बदलता मौसम और नदी-नालों में बढ़ता जलस्तर है। भारतीय विशेष सुरंग खोज एवं बचाव दल भी नेपाली सेना के साथ मिलकर प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में अभियान चला रहा है। बचावकर्मी सुरंगों के प्रवेश मार्गों को खोलने और ऑक्सीजन तथा आवश्यक उपकरण भीतर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

नेपाल के सभी आठ प्रभावित जिलों से शव बरामद किए जा चुके हैं। हजारों सुरक्षाकर्मी, सैनिक, स्वयंसेवक और स्थानीय नागरिक लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। राहत कार्यों के साथ प्रभावित परिवारों को भोजन, चिकित्सा सहायता और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम भी जारी है। कई इलाकों में पुल और सड़कें बह जाने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में मुश्किलें आ रही हैं। त्रिशुली नदी में नए सिरे से आई बाढ़ के कारण एक महत्वपूर्ण पुल के बह जाने से कुछ क्षेत्रों का मुख्य मार्ग से संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

नेपाल के अलावा चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी इस प्राकृतिक आपदा का गंभीर असर हुआ है। चीनी अधिकारियों के अनुसार तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग अब भी लापता हैं। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें भारत के नागरिक भी बताए गए हैं। नेपाल और तिब्बत को मिलाकर लापता लोगों की संख्या 3,000 से अधिक हो गई है।

विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार आपदा के बाद कई दूरदराज के क्षेत्रों में स्थिति का पूरी तरह आकलन अभी बाकी है। इसी कारण मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है। बचाव एजेंसियां मलबे, नदियों के किनारे और जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास विशेष अभियान चला रही हैं।

नेपाल सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। भारत और चीन सहित पड़ोसी देशों के विशेषज्ञों की मदद से फंसे लोगों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं। अब बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंगों और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।

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