नई दिल्ली/शिकागो, 31 अगस्त 2026। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत या उससे अधिक रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध, टैरिफ संबंधी अनिश्चितताओं और ऊर्जा तथा उर्वरक आपूर्ति में बाधाओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी विकास गति बनाए रखने की स्थिति में है। सीतारामन ने रविवार को अमेरिका के शिकागो में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए यह बात कही।
वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भारत ने जिस आर्थिक मजबूती और विकास की गति को हासिल किया है, उसे वैश्विक चुनौतियों के बावजूद बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न व्यवधान को भारत के लिए बड़ी चुनौती बताया। इस संकट के कारण कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों जैसी आवश्यक वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई।
सीतारामन के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के शुरुआती दौर में भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हुई, लेकिन सरकार ने वैकल्पिक मार्गों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेजी से कदम उठाए। उन्होंने कहा कि भारत ने परिस्थितियों के अनुरूप अपनी आपूर्ति व्यवस्था को पुनर्गठित किया और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखी।
वित्त मंत्री ने विशेष रूप से किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद सरकार ने किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया। सरकार सब्सिडी के माध्यम से उर्वरकों की कीमतों को नियंत्रित रख रही है और किसानों के लिए पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने बताया कि भारत द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उर्वरकों का बड़ा हिस्सा पहले होर्मुज मार्ग से आता था, इसलिए आपूर्ति बाधित होना गंभीर चुनौती थी।
सीतारामन ने कहा कि सरकार वैश्विक परिस्थितियों से निपटने के साथ-साथ आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया भी जारी रखेगी। उनका जोर घरेलू निवेश, पूंजीगत व्यय और अर्थव्यवस्था की आंतरिक क्षमता को मजबूत करने के साथ विदेशों से अधिक पूंजी आकर्षित करने पर है। उन्होंने कहा कि भारत कई देशों के साथ द्विपक्षीय निवेश संधियों और व्यापार समझौतों को आगे बढ़ा रहा है, ताकि वैश्विक पूंजी और निवेश को देश में लाया जा सके।
वित्त मंत्री का 7 प्रतिशत या उससे अधिक विकास दर का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के मौजूदा अनुमान से कुछ अधिक है। आरबीआई ने 5 अगस्त 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत रखा था। वहीं आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान व्यक्त किया गया था।

सीतारामन ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती का आधार घरेलू मांग, निवेश, सुधारों की निरंतरता और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने की क्षमता है। सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों को और मजबूत करते हुए भारत को तेज और टिकाऊ आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ाना है।
