रायपुर, 1 सितंबर 2026/ वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। नवा रायपुर अटल नगर स्थित ‘संवाद’ ऑडिटोरियम में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने विभाग की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि राज्य में वन संरक्षण के साथ हरित आवरण विस्तार, इको-टूरिज्म, वन्यजीव संरक्षण और वनवासियों की आजीविका को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मंत्री कश्यप ने बताया कि प्रदेश में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र विकसित किए गए हैं, जिनमें 50 से अधिक केंद्र आत्मनिर्भर हो चुके हैं। बुका झील, सतरेंगा, कोडार, तातामारी और धुधमारस सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय स्वयं सहायता समूहों और वन क्षेत्रों से जुड़े लोगों की आय के अवसर भी बढ़े हैं। इको-टूरिज्म के जरिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
हरित क्षेत्र के विस्तार को लेकर मंत्री ने बताया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 2.73 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है और पौधरोपण का कार्य जारी है। इसके साथ ही किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत भी बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ भूमि पर 3.67 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं।

वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को महत्वपूर्ण उपलब्धियां मिली हैं। मंत्री के अनुसार प्रदेश में बाघों की संख्या वर्ष 2022 में 18 से बढ़कर वर्ष 2026 में 35 हो गई है। राज्य में बाघ संरक्षण को और मजबूत करने के लिए टाइगर रिजर्व में संरक्षण गतिविधियों और निगरानी को बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर भी छत्तीसगढ़ के बाघ संरक्षण प्रयासों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अचानकमार टाइगर रिजर्व के तीन गांवों से 157 परिवारों को स्वैच्छिक रूप से अन्य स्थानों पर बसाने की प्रक्रिया भी जारी है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के साथ ही ग्रामीण परिवारों को बेहतर सुविधाएं देना है। इसके अलावा मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के लिए निगरानी, चेतावनी और ग्रामीणों तक समय पर सूचना पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत की जा रही है। राज्य में ‘गज संकेत’ जैसे तकनीकी माध्यमों और हाथी मित्र दलों के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता और त्वरित सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है।

वन्यजीव तस्करी से जुड़े एक मामले को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह मामला इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी से जुड़ा बताया गया है। शुरुआती जांच में अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका सामने आई है। वन विभाग द्वारा इस संबंध में CBI जांच के लिए प्रस्ताव तैयार किए जाने की जानकारी दी गई है।
मंत्री ने बताया कि वन क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए सड़क निर्माण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। वन विभाग द्वारा 28 प्रस्तावों में से 20 मामलों में लगभग 99.995 किलोमीटर सड़क निर्माण की मंजूरी दी गई है। इससे दूरस्थ वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आवागमन और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि वन संरक्षण के साथ वनवासियों की आजीविका और रोजगार को बढ़ावा देना भी सरकार की प्राथमिकता है। बस्तर के वन क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति बेहतर होने के बाद वानिकी गतिविधियों को फिर से विस्तार दिया जा रहा है। लकड़ी, बांस और अन्य वनोपज आधारित गतिविधियों से रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। हालिया जानकारी के अनुसार ऐसी गतिविधियों से लाखों मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की संभावना है।

प्रेस वार्ता में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडे, PCCF वन्यजीव ओ.पी. यादव, PCCF भूमि प्रबंधन सुनील मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ की प्रभारी प्रबंध निदेशक संजीता गुप्ता, CAMPA की मुख्य कार्यकारी अधिकारी शालिनी रैना सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
