नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026। देश के प्रमुख कोयला खनन क्षेत्रों में बारिश की रफ्तार कम होने के साथ ही कोयला उत्पादन और बिजली क्षेत्र को इसकी आपूर्ति में तेजी से सुधार हुआ है। कोयला मंत्रालय के अनुसार, मानसून के कमजोर पड़ने से खदानों में उत्पादन, कोयले की ढुलाई और बिजली संयंत्रों तक आपूर्ति की प्रक्रिया तेज हुई है। इससे आने वाले दिनों में कोयले की उपलब्धता और बढ़ने की उम्मीद है।
कोल इंडिया लिमिटेड का औसत दैनिक कोयला उत्पादन सितंबर के शुरुआती बारिश प्रभावित तीन दिनों में करीब 13.60 लाख टन रहा था। मौसम में सुधार के बाद यह उत्पादन बढ़कर लगभग 18.30 लाख टन प्रतिदिन पहुंच गया। इस तरह महज कुछ दिनों में दैनिक उत्पादन में करीब 35 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उत्पादन में यह उछाल खनन क्षेत्रों में लगातार बारिश से पैदा हुई बाधाओं के कम होने का संकेत है।
कोयला मंत्रालय ने बताया कि बारिश के कारण लंबे समय तक गीली और चिपचिपी हुई कोयले की परतें अब सूख रही हैं। इससे खदानों से निकाले गए कोयले को कोयला हैंडलिंग संयंत्रों तक पहुंचाना और आगे भेजना आसान हो गया है। निचले स्तर की कुछ खदानों में पानी भर जाने से उत्पादन प्रभावित हुआ था। अब अतिरिक्त पंपिंग के जरिए इन क्षेत्रों को दोबारा उत्पादन के लिए तैयार किया जा रहा है। आंतरिक खदान सड़कों की मरम्मत भी तेज गति से जारी है।
उत्पादन बढ़ने के साथ बिजली क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। सितंबर के शुरुआती तीन दिनों में बिजली क्षेत्र को औसतन करीब 13.70 लाख टन प्रतिदिन कोयला भेजा जा रहा था। यह मात्रा बढ़कर लगभग 17 लाख टन प्रतिदिन हो गई है। यानी बिजली क्षेत्र को दैनिक आपूर्ति में करीब 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
हाल के दिनों में भारी बारिश के कारण कोयले के उत्पादन और परिवहन पर दबाव पड़ा था। कई ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार भी निर्धारित स्तर से नीचे चला गया था। इसी बीच केंद्र सरकार ने बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने के लिए रेल रैक की संख्या बढ़ाने सहित कई कदम उठाए हैं। 6 सितंबर तक कोयला रैक लोडिंग बढ़कर 444 रैक प्रतिदिन हो गई थी, जबकि 3 सितंबर को यह संख्या 370 थी।
कोल इंडिया ने भी बिजली संयंत्रों को अतिरिक्त कोयला उठाने का विकल्प दिया है। ईंधन आपूर्ति समझौते वाले बिजली संयंत्र निर्धारित वार्षिक मात्रा से अतिरिक्त कोयला भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए रेल के साथ सड़क परिवहन का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। मंत्रालय के अनुसार, कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों के पास विभिन्न स्रोतों पर पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है, जिसका उपयोग बिजली क्षेत्र की आपूर्ति बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अगस्त के बीच कोल इंडिया ने 322.90 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 302.60 मिलियन टन की तुलना में 6.70 प्रतिशत अधिक है। मंत्रालय का कहना है कि बारिश का प्रभाव घटने के बाद उत्पादन और डिस्पैच में आगे भी तेजी आने की संभावना है।

कोयला आपूर्ति में सुधार का सीधा असर देश की बिजली उत्पादन व्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है। मानसून के कारण प्रभावित हुई खदानों और परिवहन व्यवस्था के सामान्य होने से ताप विद्युत संयंत्रों को नियमित ईंधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। सरकार का जोर फिलहाल कम भंडार वाले बिजली संयंत्रों तक प्राथमिकता के आधार पर कोयला पहुंचाने और ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने पर है।
