छत्तीसगढ़ विधानसभा: अविश्वास प्रस्ताव पर सत्ता-विपक्ष में तीखी नोकझोंक, कन्या विवाह योजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी उठे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को विपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के साथ ही सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस और नोकझोंक देखने को मिली। वहीं प्रश्नकाल में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत वितरित उपहार सामग्री की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा भी सदन में गूंजा।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश करते हुए कहा कि सरकार के 136 सप्ताह माताओं, बहनों और युवाओं के लिए नए षड्यंत्र और नाकामियों के प्रतीक रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे हर सप्ताह से जुड़े एक-एक आरोप, धोखे और विफलता को सदन के सामने रख रहे हैं।

इस दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के 25 वर्षों के इतिहास में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव की शुरुआत नेता प्रतिपक्ष कर रहे हैं, जिससे लगता है कि उन्हें अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है।

इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विपक्षी विधायकों से हाथ उठाकर समर्थन जताने को कहा। सभी विपक्षी विधायकों ने हाथ उठाकर नेता प्रतिपक्ष का समर्थन किया। इस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि यह और भी हास्यास्पद स्थिति है कि नेता प्रतिपक्ष के लिए विधायक इस तरह विश्वास जता रहे हैं। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने भी इसी तरह की टिप्पणी की।

जवाब में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्होंने भूपेश बघेल से पूछा था कि अविश्वास प्रस्ताव की शुरुआत कौन करेगा, जिस पर उन्होंने कहा कि आप शुरुआत कर लीजिए, बीच में मैं भी बोल लूंगा। इस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि इसका मतलब आप उनसे पूछकर काम करते हैं। नेता प्रतिपक्ष ने जवाब दिया कि इसमें कोई हर्ज नहीं है, हम सभी मिलजुलकर काम करते हैं।

इधर, प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक अनिला भेंडिया ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत वितरित उपहार सामग्री की गुणवत्ता और खर्च को लेकर सवाल उठाए।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि बालोद जिले में पिछले दो वर्षों में 7 सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 400 जोड़ों का विवाह कराया गया। इस पर 1 करोड़ 99 लाख 95 हजार 294 रुपये खर्च हुए। योजना के तहत प्रति जोड़ा श्रृंगार सामग्री के लिए 7 हजार रुपये तक की व्यय सीमा निर्धारित है, जबकि मंगलसूत्र और बिछिया के लिए अलग से कोई राशि निर्धारित नहीं है।

मंत्री ने सदन में स्वीकार किया कि उपहार सामग्री की न तो लैब टेस्टिंग कराई गई और न ही वित्तीय ऑडिट कराया गया। साथ ही किसी सप्लायर से कोई रिकवरी नहीं की गई और किसी फर्म को ब्लैकलिस्ट भी नहीं किया गया। नकली मंगलसूत्र वितरण के आरोप पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मामला बालोद जिले का नहीं है।

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