नई दिल्ली। देशभर में ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान 17 सितंबर से शुरू हो गया है। इस वर्ष अभियान का विषय ‘स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ रखा गया है। अभियान 17 अक्टूबर तक चलेगा और इसमें केंद्र एवं राज्य सरकारों के विभागों के साथ ग्रामीण-शहरी स्थानीय निकाय, शैक्षणिक संस्थान, युवा, सामाजिक संगठन और आम नागरिक भाग लेंगे। सरकार ने स्वच्छता को केवल सफाई अभियान न मानकर सामूहिक जिम्मेदारी और निरंतर व्यवहार परिवर्तन से जोड़ने पर जोर दिया है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने देशवासियों से अभियान में व्यापक भागीदारी का आह्वान किया है। इस वर्ष अभियान में विद्यार्थियों और युवाओं को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया है, ताकि स्वच्छता की आदतों को घर, स्कूल, संस्थान और समाज के स्तर पर स्थायी बनाया जा सके। अभियान के तहत स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रमों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा।
स्वच्छता ही सेवा 2026 के पांच प्रमुख स्तंभ तय किए गए हैं। पहला स्तंभ स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों और स्वच्छ सार्वजनिक स्थलों का कायाकल्प है। इसके तहत गंदे और उपेक्षित स्थानों की पहचान, मैपिंग और समयबद्ध सफाई के साथ अधिक भीड़ वाले सार्वजनिक स्थलों को भी स्वच्छ बनाने पर जोर रहेगा।
दूसरा स्तंभ ‘स्वच्छ पाठशाला-युवा फॉर स्वच्छता’ है। इसके तहत विद्यार्थियों और युवाओं को ठोस कचरा प्रबंधन केंद्रों की ‘स्वच्छता ज्ञान यात्रा’ और स्वच्छता एवं जल संचयन संवाद जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं को कचरा प्रबंधन, वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण जैसे विषयों के प्रति जागरूक करना है।
तीसरे स्तंभ के तहत ‘सफाईमित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर’ लगाए जाएंगे। इनमें सफाई मित्रों और स्वच्छता कर्मियों के स्वास्थ्य परीक्षण, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की सुविधा दी जाएगी। साथ ही स्वच्छता के क्षेत्र में योगदान देने वाले सफाई कर्मियों का स्थानीय स्तर पर सम्मान भी किया जाएगा।
चौथा स्तंभ ‘स्वच्छता के लिए जनभागीदारी’ है। इसके तहत नागरिकों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 और कचरे के चार-स्तरीय स्रोत पृथक्करण के प्रति जागरूक किया जाएगा। खेल, पौधरोपण, स्वच्छ पर्व और पर्यटन स्थलों पर विशेष स्वच्छता गतिविधियां भी अभियान का हिस्सा होंगी। विश्व पर्यटन दिवस, 27 सितंबर को अधिक भीड़ वाले पर्यटन स्थलों और पर्यटक-केंद्रित समुद्र तटों पर विशेष सफाई गतिविधियों पर जोर रहेगा।
पांचवां स्तंभ ‘स्वच्छता से समृद्धि’ है। इसमें कचरे से संपदा, कचरे से कला, पुराने कपड़ों, पुस्तकों और खिलौनों के पुन: उपयोग तथा प्लास्टिक रिसाइक्लिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य कचरे को केवल निपटाने के बजाय उसके पुन: उपयोग और संसाधन के रूप में इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है।
अभियान का सबसे बड़ा जनभागीदारी कार्यक्रम ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ 1 अक्टूबर को सुबह 8 से 9 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर के नागरिक एक घंटे के स्वैच्छिक श्रमदान के लिए एक साथ जुड़ेंगे। इसके बाद 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष ग्राम सभाएं और शहरी क्षेत्रों में विशेष परिषद बैठकें आयोजित की जाएंगी। गांवों और शहरों में ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत पौधरोपण भी किया जाएगा।

इस अभियान में सरकार ने स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ते हुए नागरिकों से अपने घर और आसपास से शुरुआत करने की अपील की है। 2017 से आयोजित हो रहा ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान इस वर्ष कचरा प्रबंधन, युवाओं की भागीदारी, सफाई मित्रों के सम्मान और सार्वजनिक स्थलों के कायाकल्प जैसे व्यापक लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रहा है।
