पहली बार जिला स्तर पर श्रम बाजार के आंकड़े जारी, 57.8 प्रतिशत जिलों में महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 40 प्रतिशत या अधिक

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने पहली बार जिला स्तर पर श्रम बाजार से जुड़े प्रमुख आंकड़े जारी किए हैं। ‘Labour Market Snapshot of Selected Districts’ के माध्यम से देश के विभिन्न जिलों में श्रम बल भागीदारी दर (LFPR), श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR), बेरोजगारी दर और युवाओं की रोजगार, शिक्षा एवं प्रशिक्षण से बाहर रहने की स्थिति (NEET) की तस्वीर सामने आई है। मंत्रालय ने यह विवरण 18 सितंबर को जारी किया।

रिपोर्ट के अनुसार लगभग 57.8 प्रतिशत जिलों में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर 40 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज की गई। वहीं 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लिए करीब 98.8 प्रतिशत जिलों में LFPR का अनुमान 40 से 80 प्रतिशत के बीच रहा। इसी आयु वर्ग में लगभग 98.3 प्रतिशत जिलों का श्रमिक जनसंख्या अनुपात भी 40 से 80 प्रतिशत के दायरे में रहा।

सबसे अधिक आबादी वाले 50 प्रतिशत जिलों में श्रमिक जनसंख्या अनुपात 37.3 प्रतिशत से 76.7 प्रतिशत के बीच रहा। यह आंकड़ा अलग-अलग जिलों के श्रम बाजार में मौजूद क्षेत्रीय विविधता को दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लगभग 77.8 प्रतिशत जिलों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग की बेरोजगारी दर 0.5 से 5.5 प्रतिशत के बीच रही।

देश के 100 सबसे अधिक आबादी वाले जिलों की तुलना में गुजरात का सूरत जिला श्रम बल भागीदारी दर और श्रमिक जनसंख्या अनुपात, दोनों के मामले में सबसे ऊपर रहा। सूरत में LFPR 68.6 प्रतिशत और WPR 67.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद बिहार का अररिया जिला 68 प्रतिशत LFPR और 67.4 प्रतिशत WPR के साथ दूसरे प्रमुख जिलों में रहा, जबकि तमिलनाडु का सलेम जिला 67.8 प्रतिशत LFPR के साथ आगे रहा।

इसके विपरीत, 100 सर्वाधिक आबादी वाले जिलों में बिहार का दरभंगा जिला LFPR और WPR दोनों के मामले में सबसे निचले स्तर पर रहा। इस तुलना से स्पष्ट होता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में श्रम बाजार की भागीदारी और रोजगार की स्थिति में उल्लेखनीय अंतर है।

बेरोजगारी के आंकड़ों में पश्चिम बंगाल का दक्षिण 24 परगना और बिहार का अररिया जिला 0.9 प्रतिशत की सबसे कम बेरोजगारी दर वाले प्रमुख जिलों में रहे। गुजरात का अहमदाबाद 1.1 प्रतिशत बेरोजगारी दर के साथ इस सूची में शामिल रहा। रिपोर्ट में युवाओं की स्थिति से जुड़ा NEET संकेतक भी शामिल किया गया है। इसके अनुसार 75 प्रतिशत से अधिक जिलों में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की NEET दर 30 प्रतिशत से कम रही।

राज्य की राजधानियों वाले जिलों के आंकड़ों में भी महत्वपूर्ण अंतर सामने आया। हिमाचल प्रदेश का शिमला जिला 70 प्रतिशत LFPR और 65.1 प्रतिशत WPR के साथ सबसे ऊपर रहा। केरल का तिरुवनंतपुरम 64.4 प्रतिशत LFPR और 63.2 प्रतिशत WPR के साथ दूसरे प्रमुख स्थान पर रहा। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में LFPR 61.5 प्रतिशत और WPR 59.4 प्रतिशत दर्ज किया गया।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जिला स्तर पर ये आंकड़े पहली बार जारी किए जाने से स्थानीय स्तर पर श्रम बाजार की स्थिति को समझने के लिए एक नया सांख्यिकीय आधार उपलब्ध हुआ है। जिला स्तर के ऐसे आंकड़े रोजगार, कौशल विकास और श्रम बाजार से जुड़ी योजनाओं के लिए क्षेत्र विशेष की स्थिति समझने में उपयोगी हो सकते हैं।

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