भारत ने स्वीडिश कंपनियों के वैश्विक कारोबारी अनुभवों पर आधारित ग्लोबल बिजनेस क्लाइमेट सर्वे 2026 में 41 अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच पहला स्थान हासिल किया है। सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में कारोबार कर रही स्वीडिश कंपनियों ने देश के कारोबारी माहौल के प्रति सबसे सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। यह सर्वे Business Sweden, Swedish Chambers International तथा विदेशों में स्वीडन के दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के सहयोग से तैयार किया गया है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सर्वे के निष्कर्ष साझा किए। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत का कारोबारी वातावरण स्थिरता, विकास और व्यापार सुगमता के लिए नए मानक स्थापित कर रहा है। सर्वेक्षण में 41 बाजारों में काम कर रही स्वीडिश कंपनियों के अनुभवों और दृष्टिकोणों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।
ग्लोबल बिजनेस क्लाइमेट सर्वे 2026 में दुनिया भर के 41 बाजारों में कार्यरत स्वीडिश कंपनियों के 2,250 से अधिक वरिष्ठ स्तर के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उनसे अपने प्रमुख बाजारों में कारोबारी वातावरण, आर्थिक परिस्थितियों, लाभप्रदता, निवेश और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े 18 मानक प्रश्न पूछे गए। सर्वेक्षण का उद्देश्य अलग-अलग देशों में स्वीडिश कंपनियों के कारोबारी अनुभवों की तुलनात्मक तस्वीर सामने लाना है।
सर्वेक्षण में भारत का प्रदर्शन कई प्रमुख संकेतकों पर मजबूत रहा। भारत में सर्वे में शामिल 73 प्रतिशत स्वीडिश कंपनियों ने कारोबारी माहौल के बारे में सकारात्मक राय व्यक्त की। इसके अलावा 61 प्रतिशत कंपनियों ने अगले 12 महीनों में भारत में अपना निवेश बढ़ाने की योजना बताई। रिपोर्ट के अनुसार भारत बाजार वृद्धि, प्रतिभा उपलब्धता, डिजिटलीकरण और आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंच जैसे कई कारोबारी संकेतकों पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के औसत से बेहतर या उसके बराबर रहा।
Business Sweden की भारत संबंधी 2026 रिपोर्ट में भी स्वीडिश कंपनियों की भारत के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता सामने आई है। भारत में सर्वे में शामिल 213 स्वीडिश कंपनियों में अधिकांश कंपनियां लाभ की स्थिति में हैं और बड़ी संख्या में कंपनियां आने वाले वर्ष में निवेश बढ़ाने की योजना बना रही हैं। रिपोर्ट में तेजी से हो रहे औद्योगिकीकरण, डिजिटल परिवर्तन, बुनियादी ढांचे में निवेश और बढ़ते उपभोक्ता बाजार को भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसरों के रूप में रेखांकित किया गया है।
हालांकि सर्वेक्षण में भारत में कारोबार करने वाली कंपनियों के सामने आने वाली कुछ चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें प्रशासनिक जटिलता, नियामकीय अनिश्चितता और व्यापार संबंधी बाधाएं शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सकारात्मक कारोबारी धारणा के साथ कंपनियां परिचालन स्तर पर कुछ चुनौतियों का भी सामना कर रही हैं।
वैश्विक स्तर पर सर्वेक्षण में 80 प्रतिशत कंपनियों ने कारोबारी माहौल के प्रति तटस्थ या सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। करीब 65 प्रतिशत कंपनियों को अगले वर्ष अपने उद्योग के कारोबार में वृद्धि की उम्मीद है और लगभग आधी कंपनियां अपने निवेश में बढ़ोतरी की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। एशिया-प्रशांत क्षेत्र को सर्वेक्षण में सबसे अधिक आशावादी क्षेत्र के रूप में सामने रखा गया है।

भारत का यह प्रदर्शन ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, व्यापारिक बाधाओं और बदलते नियामकीय वातावरण से प्रभावित है। सर्वेक्षण के निष्कर्ष स्वीडिश कंपनियों के दृष्टिकोण को दर्शाते हैं और भारत में विदेशी कंपनियों के कारोबारी अनुभवों तथा निवेश योजनाओं की एक महत्वपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
