विश्व अल्जाइमर दिवस पर नई शोध से उम्मीद, ब्लड टेस्ट से शुरुआती संकेतों की पहचान संभव

आज विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर सामने आई एक नई वैज्ञानिक शोध ने इस बीमारी की शुरुआती पहचान को लेकर नई उम्मीद जगाई है। द लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, अल्जाइमर से जुड़े कुछ शुरुआती जैविक बदलावों का पता वयस्क अवस्था में ही रक्त परीक्षण के जरिए लगाया जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्य ब्लड टेस्ट के आधार पर फिलहाल अल्जाइमर की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

शोध में मध्यम आयु वर्ग के लोगों के रक्त में अल्जाइमर से जुड़े प्रमुख बायोमार्कर्स की जांच की गई। इनमें फॉस्फोराइलेटेड टाऊ और अमाइलॉइड-बीटा जैसे प्रोटीन शामिल थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ प्रतिभागियों में अल्जाइमर से जुड़े शुरुआती जैविक बदलाव मौजूद थे और ऐसे लोगों ने याददाश्त तथा सोचने-समझने से संबंधित परीक्षणों में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन किया।

अध्ययन में उम्र, बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई, किडनी की कार्यक्षमता और एपीओई जीन जैसे अन्य कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी इन बायोमार्कर्स और संज्ञानात्मक प्रदर्शन के बीच संबंध देखा गया।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अल्जाइमर के कारण होने वाले मस्तिष्क संबंधी बदलाव बीमारी के स्पष्ट लक्षण सामने आने से कई वर्ष पहले शुरू हो सकते हैं। ऐसे में शुरुआती जैविक संकेतों की पहचान भविष्य में समय रहते निगरानी और संभावित हस्तक्षेप के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया है कि इस शोध के आधार पर अभी यह नहीं कहा जा सकता कि केवल रक्त परीक्षण से किसी व्यक्ति में भविष्य में अल्जाइमर होने की निश्चित जानकारी मिल जाएगी। इस दिशा में बड़े स्तर पर और शोध की आवश्यकता है।

इसके बावजूद, अध्ययन से यह संभावना मजबूत हुई है कि भविष्य में आसान, कम खर्चीले और कम आक्रामक रक्त परीक्षणों के माध्यम से अल्जाइमर से जुड़े शुरुआती संकेतों की पहचान में मदद मिल सकती है।

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