महिला श्रम बल भागीदारी दर में सरगुजा ने हासिल किया देश में चौथा स्थान

रायपुर। छत्तीसगढ़ ने महिला श्रम बल भागीदारी और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी देश की पहली जिला स्तरीय श्रम बाजार रिपोर्ट में राज्य के सरगुजा और रायपुर जिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, महिला श्रम बल भागीदारी दर (Female LFPR) के मामले में सरगुजा देश में चौथे स्थान पर रहा है। वहीं, राज्य की राजधानी रायपुर ने देश के राज्य राजधानी जिलों के बीच श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) और श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) दोनों में तीसरा स्थान हासिल किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सरगुजा में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर 69.0 प्रतिशत और महिला श्रमिक जनसंख्या अनुपात 68.0 प्रतिशत दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा देश के उन प्रमुख जिलों में सरगुजा की मजबूत स्थिति को दर्शाता है, जिन्हें राज्यों के 10 सर्वाधिक महिला आबादी वाले जिलों में से चयनित किया गया था। महिला LFPR के मामले में हिमाचल प्रदेश का हमीरपुर 80.9 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर रहा, जबकि ओडिशा का मयूरभंज 71.8 प्रतिशत और जम्मू-कश्मीर का बडगाम 71.4 प्रतिशत के साथ इसके बाद रहे।

राजधानी जिलों में रायपुर की मजबूत स्थिति

राज्य राजधानी जिलों की तुलना में भी छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। रिपोर्ट के मुताबिक 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में रायपुर का LFPR 61.5 प्रतिशत और WPR 59.4 प्रतिशत रहा। इस आधार पर रायपुर राज्य राजधानी जिलों में दोनों संकेतकों में तीसरे स्थान पर रहा। इससे पहले हिमाचल प्रदेश का शिमला और केरल का तिरुवनंतपुरम क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर रहे।

LFPR यानी Labour Force Participation Rate किसी आयु वर्ग की उस आबादी के अनुपात को दर्शाता है जो श्रम बल में शामिल है, जबकि WPR यानी Worker Population Ratio उस आबादी के अनुपात को दर्शाता है जो वास्तव में रोजगार में है। इन दोनों संकेतकों का जिला स्तर पर उपलब्ध होना स्थानीय स्तर पर रोजगार और श्रम बाजार की स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देश में पहली बार जिला स्तर पर श्रम बाजार की तस्वीर

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ‘Labour Market Snapshot of Selected Districts’ रिपोर्ट देश में पहली बार जिला स्तर पर प्रमुख श्रम बाजार संकेतकों की तस्वीर प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट में LFPR, WPR, बेरोजगारी दर (UR) और 15-29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर रहने वाले लोगों यानी NEET से जुड़े आंकड़े शामिल किए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 57.8 प्रतिशत जिलों में महिला LFPR 40 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज किया गया। वहीं, करीब 98.8 प्रतिशत जिलों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग का LFPR 40 से 80 प्रतिशत के बीच रहा। WPR के मामले में भी करीब 98.3 प्रतिशत जिलों के आंकड़े 40 से 80 प्रतिशत के दायरे में रहे।

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का बढ़ता महत्व

सरगुजा का 69 प्रतिशत महिला LFPR यह दर्शाता है कि जिले में बड़ी संख्या में महिलाएं श्रम बाजार में भागीदारी कर रही हैं। महिला श्रम भागीदारी में वृद्धि परिवार की आय, स्थानीय अर्थव्यवस्था और महिलाओं की आर्थिक भूमिका से जुड़े व्यापक पहलुओं के लिए महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है।

छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की बड़ी आबादी को देखते हुए जिला स्तर पर उपलब्ध ऐसे आंकड़े स्थानीय श्रम बाजार की वास्तविक स्थिति को समझने में उपयोगी हो सकते हैं। इससे रोजगार, कौशल विकास, महिला केंद्रित आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताई खुशी

छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की पहली जिला स्तरीय श्रम बाजार रिपोर्ट में रायपुर और सरगुजा का देश के अग्रणी जिलों में स्थान बनाना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला श्रम बल की बढ़ती भागीदारी राज्य में महिलाओं की आर्थिक सक्रियता और अवसरों की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने कहा कि रायपुर और सरगुजा के आंकड़े राज्य के लिए उत्साहजनक हैं और इससे महिला सशक्तिकरण, रोजगार तथा आजीविका के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को नई ऊर्जा मिलेगी।

जिला स्तर के आंकड़ों से नीति निर्माण में मिलेगी मदद

NSO की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 से संशोधित PLFS डिजाइन में अधिकांश क्षेत्रों के लिए जिले को मूल सैंपलिंग स्तर बनाया गया है। इससे पहले PLFS मुख्य रूप से NSS क्षेत्रों पर आधारित था और जिला स्तर पर ऐसे अनुमान तैयार करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन नहीं किया गया था।

जिला स्तर के श्रम बाजार आंकड़ों से रोजगार, बेरोजगारी, महिला श्रम भागीदारी और युवाओं की स्थिति को अधिक स्थानीय स्तर पर समझने का अवसर मिलेगा। हालांकि, NSO ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये अनुमान नमूना सर्वेक्षण पर आधारित हैं और इनके विश्लेषण में sampling variability तथा Relative Standard Error जैसी सीमाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सरगुजा और रायपुर की उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब देश में जिला स्तर पर रोजगार और श्रम बाजार की स्थिति को समझने के लिए पहली बार व्यापक आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध हुए हैं। छत्तीसगढ़ के इन दोनों जिलों के प्रदर्शन ने राज्य को महिला आर्थिक भागीदारी और राजधानी क्षेत्र के श्रम बाजार संकेतकों के स्तर पर राष्ट्रीय मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।

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