सुकमा, 23 सितंबर 2026। सुकमा वनमंडल के सुकमा वन परिक्षेत्र में बाघ की संभावित मौजूदगी के संकेत मिलने के बाद वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की है। वन विभाग के अनुसार, क्षेत्र में एक मवेशी के मारे जाने की सूचना मिलने के बाद मौके का निरीक्षण किया गया। घटनास्थल पर बाघ के संभावित पगमार्क मिलने से क्षेत्र में उसकी संभावित आवाजाही की आशंका जताई गई है। वन विभाग और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जबकि पशु चिकित्सकों की टीम ने भी घटनास्थल का परीक्षण किया।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मौके पर मिले साक्ष्यों के आधार पर फिलहाल क्षेत्र में बाघ की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। संभावित बाघ की गतिविधियों के संबंध में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों में वन विभाग की विशेष टीमें तैनात की गई हैं।

वन विभाग ने कोयाबेकुर, नीलावरम, फूलबगड़ी और केरलपाल पंचायत सहित आसपास के वन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। इन क्षेत्रों में ग्रामीणों को बाघ की संभावित गतिविधियों के प्रति जागरूक करने के लिए मुनादी कराई जा रही है। साथ ही संभावित मार्गों और गतिविधियों वाले स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं, ताकि बाघ की मौजूदगी और उसके आवागमन की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके।
वन विभाग ने ग्रामीणों से विशेष रूप से अपील की है कि वे शाम चार बजे के बाद जंगल में जाने से बचें। आवश्यक होने पर जंगल में अकेले जाने के बजाय समूह में जाने की सलाह दी गई है। जंगल या उसके आसपास बाघ दिखाई देने की स्थिति में उसके पास जाने, उसका पीछा करने या भीड़ जुटाने से बचने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बाघ को स्वयं पकड़ने, भगाने या किसी तरह नुकसान पहुंचाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से यह भी कहा है कि बाघ की संभावित आवाजाही अथवा किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल वन विभाग को दें। बाघ से संबंधित अपुष्ट फोटो, वीडियो या सूचनाओं को सोशल मीडिया पर प्रसारित नहीं करने की अपील की गई है। ग्रामीणों से कहा गया है कि वे केवल वन विभाग अथवा जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें।
वन विभाग के अनुसार, पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से संभावित प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। वन अमले को सतर्क रहने तथा स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि ग्रामीणों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण, दोनों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
मवेशी की मौत बाघ के हमले से होने की पुष्टि होने पर शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र पशुपालक को नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा। वन विभाग ने ग्रामीणों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने और किसी भी सूचना की स्थिति में तत्काल विभाग को सूचित करने को कहा है।

बाघ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची-I में संरक्षित वन्यजीव है। इसके शिकार, हत्या या शिकार के प्रयास पर कानून में कठोर दंड का प्रावधान है। इसलिए ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे कानून अपने हाथ में न लें और बाघ से संबंधित किसी भी स्थिति में तत्काल वन विभाग की सहायता लें।
