लोकायन-2026 अभियान के तहत भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस सुदर्शिनी मिस्र के अलेक्जेंड्रिया बंदरगाह पहुंचा

भारतीय नौसेना का प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी अपने वर्तमान लोकायन-2026 अंतरमहासागरीय अभियान के तहत 23 सितंबर 2026 को मिस्र के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर अलेक्जेंड्रिया पहुंचा। इस अभियान के दौरान अलेक्जेंड्रिया में इस पोत का यह दूसरा दौरा है।

10 महीने का यह अभियान 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से शुरू हुआ था। इसके तहत आईएनएस सुदर्शिनी को 13 देशों के 18 बंदरगाहों से होते हुए लगभग 22 हजार समुद्री मील की दूरी तय करनी है। अपनी यात्रा शुरू करने के बाद से, तीन मस्तूल वाले इस जहाज ने अरब सागर, लाल सागर और भूमध्य सागर का सफर तय किया है। इस दौरान पोत स्वेज नहर से होकर गुजरा और इसने फ्रांस में आयोजित प्रतिष्ठित ‘एस्केल ए सेते’ समुद्री महोत्सव में भी भाग लिया।

आईएनएस सुदर्शिनी ने इसके बाद अटलांटिक महासागर पार करने की अपनी पहली ऐतिहासिक यात्रा पूरी की। पोत ने केप वर्डे से 19 दिन की समुद्री यात्रा के बाद 27 मई 2026 को एंटीगुआ में प्रवेश किया। यात्रा के दौरान, जहाज ने कोच्चि से निकलने के बाद 10,000 नॉटिकल मील की दूरी तय करने का मील का पत्थर पार किया ।

इसके बाद जहाज अजोरेस और पुर्तगाल के लिए रवाना हुआ; यह 22 अगस्त 2026 को लिस्बन पहुंचा, जो सात महीनों में उसका 15वां बंदरगाह दौरा था ।

इस समुद्री यात्रा के दौरान प्रशिक्षुओं को लंबी दूरी की समुद्री नौवहन और पारंपरिक नाविक कौशल का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ है। भूमध्य सागर के मार्ग पर उन्हें खुले समुद्र में पोत संचालन, पाल संभालने और पारंपरिक नाविक कौशल का भी व्यावहारिक अनुभव मिला है।

अलेक्जेंड्रिया पहुंचने पर आईएनएस सुदर्शिनी का स्वागत अलेक्जेंड्रिया नौसैनिक अड्डे के कमांडर रियर एडमिरल मोहम्मद अब्देल अजीज और भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों ने किया। बंदरगाह यात्रा के दौरान शिष्टाचार भेंट, दोनों नौसेनाओं के बीच पोतों का पारस्परिक दौरा और मिस्र की नौसेना के साथ पेशेवर संवाद आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों से पेशेवर आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ भारत और मिस्र के बीच समुद्री संबंधों को और सशक्त करने में मदद मिलेगी।

लोकायन-2026 भारतीय नौसेना की पेशेवर प्रशिक्षण, समुद्री पहुंच बढ़ाने तथा मित्र देशों के साथ मैत्री और सहयोग के संबंधों को मजबूत करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस तैनाती के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने भारत की समृद्ध समुद्री विरासत के ‘चलते-फिरते राजदूत’ के रूप में भूमिका निभाई है। इस पोत ने समुद्रों के पार वसुधैव कुटुंबकम का संदेश और महासागर (क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया है।

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