देश आज महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती मना रहा है। वर्ष 1907 में आज ही के दिन पंजाब के तत्कालीन लायलपुर जिले के बंगा गांव में उनका जन्म हुआ था, जो वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है।

भगत सिंह ने बेहद कम उम्र में अपने अदम्य साहस, विचारों और सर्वोच्च बलिदान से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर गहरी छाप छोड़ी। महज 23 वर्ष की आयु में 23 मार्च 1931 को उन्हें राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी दी गई। उनकी शहादत ने देशभर में स्वतंत्रता और देशभक्ति की भावना को और मजबूत किया।
भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी योद्धा ही नहीं, बल्कि गंभीर चिंतक और बुद्धिजीवी भी थे। वे समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और शोषणमुक्त समाज के विचारों के समर्थक थे। उनका प्रसिद्ध नारा “इंकलाब जिंदाबाद” स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नारों में शामिल हुआ और आज भी उनके विचारों तथा संघर्ष की याद दिलाता है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भगत सिंह ने अदम्य साहस और वीरता के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने की भगत सिंह की भावना भारत के युवाओं के साहस और संकल्प की प्रतीक है।
भगत सिंह का जीवन और उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। उनकी जयंती पर देश उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहा है।
