रायपुर, 29 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में टीबी उन्मूलन अभियान को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। प्रदेश के चार विकासखंडों—मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खड़गवां, सरगुजा जिले के बतौली, कोरिया जिले के सोनहत और रायगढ़ जिले के घरघोड़ा—ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित टीबी-मुक्त विकासखंड के मानकों को पूरा किया है। इन विकासखंडों में टीबी की पहचान से लेकर उपचार और मरीजों को पोषण सहयोग उपलब्ध कराने तक की व्यवस्थाओं को निर्धारित मापदंडों के अनुरूप सुनिश्चित किया गया है।
टीबी मुक्त विकासखंड का दर्जा केवल मरीजों की संख्या कम होने के आधार पर नहीं दिया जाता। इसके लिए क्षेत्र में टीबी की सक्रिय पहचान, पर्याप्त जांच, मरीजों का समय पर पंजीयन, उपचार की सफलता और पोषण सहायता जैसे कई मानकों को पूरा करना आवश्यक होता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार निर्धारित मूल्यांकन में प्रति एक हजार आबादी पर कम से कम 30 संभावित लोगों की टीबी जांच, प्रति एक हजार से अधिक आबादी पर एक या उससे कम टीबी केस नोटिफिकेशन, 90 प्रतिशत या उससे अधिक उपचार सफलता दर तथा चिन्हित टीबी मरीजों को शत-प्रतिशत पोषण सहयोग जैसे प्रमुख मानकों को शामिल किया गया है।
राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी की जांच और उपचार की सेवाएं देशभर में सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं। केंद्रीय क्षय प्रभाग के अनुसार टीबी की समय पर पहचान और निर्धारित उपचार पूरा करना बीमारी के नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार टीबी मरीजों के लिए पोषण सहायता की व्यवस्था भी करती है। निक्षय पोषण योजना के तहत उपचार अवधि के दौरान पात्र टीबी मरीजों को पोषण सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।
छत्तीसगढ़ के इन चार विकासखंडों की उपलब्धि के पीछे लगातार जांच और स्क्रीनिंग अभियान, संभावित मरीजों की सक्रिय खोज, समय पर जांच, उपचार की निगरानी और जनजागरूकता गतिविधियों की भूमिका रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समुदाय को टीबी के लक्षणों और समय पर जांच के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है। टीबी मरीजों को उपचार के दौरान आवश्यक पोषण सहयोग उपलब्ध कराने में निक्षय मित्रों और सामुदायिक सहभागिता ने भी योगदान दिया है।
सोनहत विकासखंड में टीबी मुक्त अभियान के तहत सक्रिय खोज और अधिक से अधिक लोगों की जांच पर विशेष ध्यान दिया गया। वहां निर्धारित मानकों के आधार पर जमीनी स्तर पर अभियान की प्रगति का मूल्यांकन भी किया गया। इसी तरह खड़गवां में भी राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मुक्त भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए जांच और मरीजों की पहचान पर जोर दिया गया।
केंद्रीय क्षय प्रभाग के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर टीबी उन्मूलन के लिए जांच, उपचार और उपचार पूरा कराने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। उपचार सफलता दर टीबी नियंत्रण कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण संकेतक है और मरीजों को निर्धारित उपचार पूरा कराना आवश्यक माना जाता है।

छत्तीसगढ़ के खड़गवां, बतौली, सोनहत और घरघोड़ा का निर्धारित मानकों को पूरा करना प्रदेश में टीबी उन्मूलन की दिशा में स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की उपलब्धि है। अब इन क्षेत्रों में हासिल प्रगति को बनाए रखना, नए मामलों की समय पर पहचान करना और उपचार की निरंतरता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा। स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों में जनभागीदारी को और मजबूत करने से टीबी के प्रति जागरूकता तथा मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को भी गति मिलेगी।
