बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन, 8-9 अक्टूबर को जगदलपुर में जुटेंगे 15 राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी

रायपुर, 6 अक्टूबर 2026/ बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा 8 और 9 अक्टूबर को जगदलपुर में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ अधिकारी ‘सहकार से समृद्धि’ की कार्ययोजना पर मंथन करेंगे। सम्मेलन की अध्यक्षता भारत सरकार के सहकारिता विभाग के सचिव आशीष कुमार भूटानी करेंगे। इसमें अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के प्रबंध संचालक पंकज बंसल तथा भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

सम्मेलन में 15 राज्यों के सहकारिता सचिव और 14 राज्यों के सहकारी समितियों के पंजीयक भाग लेंगे। दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने और सहकारी संस्थाओं की पहुंच को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। विशेष रूप से मल्टीपर्पस प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (एम-पैक्स), दुग्ध समितियों, डिजिटल सेवाओं, भंडारण क्षमता और सहकारी बैंकिंग के सशक्तिकरण पर मंथन किया जाएगा।

सम्मेलन में एम-पैक्स के कंप्यूटरीकरण, सहकारिता क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के उपयोग तथा प्राथमिक समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित करने के अनुभव साझा किए जाएंगे। एम-पैक्स के माध्यम से उर्वरक और अन्य कृषि आदानों के वितरण तथा बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय पर भी चर्चा होगी। सम्मेलन में अगले तीन महीनों के लिए प्राथमिकता वाले कार्यों और राज्यवार कार्ययोजना तैयार करने पर विशेष जोर रहेगा।

पहले दिन सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की समीक्षा की जाएगी। विभिन्न राज्य एम-पैक्स और दुग्ध समितियों के गठन, सदस्यता विस्तार, डिजिटल सेवाओं तथा किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के अपने अनुभव साझा करेंगे। कारोबार के विविधीकरण, प्राथमिक समितियों को राष्ट्रीय निर्यात, जैविक और बीज सहकारी संस्थाओं से जोड़ने तथा विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के क्रियान्वयन पर भी चर्चा होगी।

दूसरे दिन नाबार्ड और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम आगामी पांच वर्षों में वित्तीय सहयोग तथा राज्यवार लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। एम-पैक्स के माध्यम से उर्वरक और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता बढ़ाने तथा जिला स्तर पर सफल सहकारी मॉडलों को अपनाने पर विचार किया जाएगा। सम्मेलन में शामिल अधिकारी बस्तर की एम-पैक्स, लघु वनोपज और जनजातीय सहकारी समितियों का भ्रमण भी करेंगे।

छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ रहा सहकारी नेटवर्क

सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना के अनुसार ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 515 नए एम-पैक्स, 356 मत्स्य, 364 दुग्ध, 153 लघु वनोपज और 63 महिला बहुउद्देशीय सहकारी समितियां गठित की गई हैं। ‘सहकारिताओं में सहकार’ अभियान के तहत जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में 3.18 लाख नए कृषकों के खाते खोले गए हैं। राज्य के 2,058 एम-पैक्स में उपलब्ध माइक्रो एटीएम से अब तक 324 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन हुए हैं।

भंडारण क्षमता विस्तार पर जोर

राज्य में एम-पैक्स के लिए 200 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदामों का निर्माण किया जा रहा है। आरआईडीएफ योजना 2022 के तहत 725 एम-पैक्स में गोदाम बनाए गए हैं। वर्ष 2025 में गोदाम विहीन अथवा जर्जर गोदाम वाले 100 एम-पैक्स में निर्माण की योजना स्वीकृत की गई। नवगठित 515 एम-पैक्स में भी गोदाम निर्माण प्रस्तावित है। विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत राज्य के 46 एम-पैक्स चयनित हैं, जिनमें 20 के लिए ऋण स्वीकृत, नौ को एएमआई सब्सिडी और छह में निर्माण शुरू हो चुका है।

राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं से जुड़ रहे एम-पैक्स

उपार्जन के लिए एनसीसीएफ को 14 और नाफेड को 15 जिलों में एजेंसी बनाया गया है। एनसीसीएफ में राज्य के 2,058 और नाफेड में 412 एम-पैक्स पंजीकृत हैं। वहीं 1,681 एम-पैक्स राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति, 1,633 राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति और 1,746 भारतीय बीज सहकारी समिति से जुड़े हैं।

एथेनॉल संयंत्रों से मूल्य संवर्धन और रोजगार

कोंडागांव में 80 केएलपीडी क्षमता के एथेनॉल संयंत्र के माध्यम से स्थानीय मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन और रोजगार सृजन हो रहा है। भोरमदेव में पीपीपी मॉडल पर संचालित 80 केएलपीडी संयंत्र सहकारी शक्कर कारखाने को आय का अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध करा रहा है। पंडरिया, अंबिकापुर और बालोद में तीन और एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। इन परियोजनाओं से कृषि उपज के मूल्य संवर्धन, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बस्तर में पहली बार आयोजित हो रहा यह राष्ट्रीय सम्मेलन छत्तीसगढ़ के सहकारी मॉडल और विशेषकर एम-पैक्स, लघु वनोपज तथा जनजातीय सहकारिता से जुड़े अनुभवों को राष्ट्रीय मंच पर साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। सम्मेलन में राज्यों के अनुभवों के आधार पर सहकारी संस्थाओं की पहुंच, सेवाओं और कारोबार के विस्तार की आगामी दिशा तय करने पर जोर रहेगा।

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