समावेशी और सतत विकास का माध्यम बने प्रौद्योगिकी: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली, 06 अक्टूबर 2026/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि प्रौद्योगिकी केवल आर्थिक और तकनीकी प्रगति का साधन नहीं, बल्कि समावेशी और सतत विकास का माध्यम बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के किसी भी वर्ग को पीछे न छूटने देने के लिए प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने आज सेवा तीर्थ में ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (जीएसएमए) के बोर्ड सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान यह बात कही। यह बैठक 7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित होने वाले इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 से पहले हुई। इस वर्ष इंडिया मोबाइल कांग्रेस की थीम ‘Scale Without Boundaries’ है, जो तकनीक और डिजिटल समाधानों को अधिक व्यापक स्तर पर पहुंचाने पर केंद्रित है।

प्रधानमंत्री ने डिजिटल सेवाओं और प्रौद्योगिकी को किफायती तथा सुलभ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल परिवर्तन का वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा, जब तकनीक समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विशेष रूप से अल्पविकसित और विकासशील देशों में डिजिटल विभाजन को कम करने के लिए कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाना जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने विकासशील देशों के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को परिवर्तनकारी शक्ति बताते हुए कहा कि भारत का अनुभव इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने नागरिक सेवाओं, वित्तीय समावेशन और डिजिटल लेनदेन को बड़े पैमाने पर सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और दूरसंचार कनेक्टिविटी को समावेशी ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है।

बातचीत के दौरान डिजिटल और साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती चुनौती पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित करने होंगे। उन्होंने उपयोगकर्ताओं को संभावित धोखाधड़ी वाले कॉल और डिजिटल गतिविधियों के प्रति सचेत करने के लिए लगातार जागरूकता संदेशों की आवश्यकता बताई। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए वैश्विक मानकों और साझा नियमों की जरूरत पर भी जोर दिया।

डीपफेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार होने वाली भ्रामक सामग्री के बढ़ते खतरे का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने ऐसे तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई, जिनसे उपयोगकर्ता किसी सामग्री के स्रोत और उसकी विश्वसनीयता की तुरंत पहचान कर सकें। भारत ने वैश्विक स्तर पर भी सुरक्षित, विश्वसनीय और मानव-केंद्रित डिजिटल प्रौद्योगिकी की आवश्यकता पर जोर दिया है।

जीएसएमए बोर्ड के सदस्यों ने डिजिटल और मोबाइल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भारत के तेजी से उभरते वैश्विक नेतृत्व की सराहना की। बैठक में 4जी और 5जी नेटवर्क के विस्तार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के बड़े पैमाने पर उपयोग तथा भारत में दूरसंचार और मोबाइल विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर चर्चा हुई। भारत की डिजिटल यात्रा में दूरसंचार के साथ-साथ 6जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, क्लाउड, सैटेलाइट संचार और हरित प्रौद्योगिकी जैसे नए क्षेत्रों पर भी तेजी से काम हो रहा है।

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों, स्टार्टअप, नीति-निर्माताओं और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञों के एक बड़े समूह के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन में 5जी, 6जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड और एज कंप्यूटिंग, सैटेलाइट संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, क्वांटम तकनीक और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों पर विशेष चर्चा होगी।

बैठक में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर, जीएसएमए बोर्ड के सदस्य तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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