खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने छह महीने तक के शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 में संशोधन का मसौदा प्रकाशित किया गया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य शिशुओं को आयु के अनुरूप उचित पोषण उपलब्ध कराना तथा जीवन के शुरुआती छह महीनों में उनके स्वस्थ विकास को बढ़ावा देना है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, मसौदे पर आम लोगों और संबंधित हितधारकों से 60 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
शिशुओं के पोषण मानकों को मजबूत करने की पहल
एफएसएसएआई की ओर से प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण खाद्य पदार्थ) संशोधन विनियम, 2026 का उद्देश्य शिशुओं के लिए तैयार खाद्य उत्पादों में अतिरिक्त शर्करा के उपयोग को नियंत्रित करना है। भारत के राजपत्र में 16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, छह महीने तक के शिशुओं के लिए निर्धारित उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित संशोधन खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत तैयार किया गया है। इसके माध्यम से मौजूदा नियमों में बदलाव कर शिशु पोषण उत्पादों की संरचना को उनकी आयु संबंधी पोषण आवश्यकताओं के अनुरूप रखने पर जोर दिया गया है। हालांकि, यह अभी मसौदा है और इसे अंतिम रूप दिए जाने से पहले प्राप्त सुझावों तथा आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।
जीवन के पहले छह महीने पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण
शिशु के जीवन के शुरुआती छह महीने उसके शारीरिक विकास और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में उचित पोषण की भूमिका विशेष होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित संशोधन में शिशुओं के लिए तैयार खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज के उपयोग पर विशेष प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है।
मौजूदा नियमों में शिशु पोषण उत्पादों की पोषण संरचना, गुणवत्ता और सुरक्षा से संबंधित मानक निर्धारित हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट के स्रोतों के रूप में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को प्राथमिकता दी गई है, जबकि सुक्रोज और फ्रक्टोज का उपयोग निर्धारित शर्तों और सीमाओं के अधीन किया जा सकता है। नए मसौदे में छह महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले उत्पादों में इन दोनों शर्कराओं को मिलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
अतिरिक्त शर्करा से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों पर ध्यान
एफएसएसएआई की इस पहल का उद्देश्य बचपन में अतिरिक्त शर्करा के सेवन से संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के व्यापक जनस्वास्थ्य प्रयासों को समर्थन देना भी है। आहार में अनावश्यक शर्करा की अधिकता को लेकर बचपन में मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं की आशंकाओं पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में शिशुओं के लिए तैयार खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और पोषण संबंधी संरचना को बेहतर बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रस्तावित बदलाव का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशु पोषण उत्पाद उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएं और उनमें अनावश्यक रूप से सुक्रोज तथा फ्रक्टोज न मिलाए जाएं।
60 दिनों में दे सकेंगे आपत्तियां और सुझाव
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, संशोधन का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए प्रकाशित किया गया है। संबंधित निर्माता, विशेषज्ञ, हितधारक और अन्य इच्छुक व्यक्ति निर्धारित 60 दिनों की अवधि के भीतर अपनी आपत्तियां और सुझाव एफएसएसएआई को भेज सकते हैं। सुझाव मुख्य कार्यकारी अधिकारी, खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण, एफडीए भवन, कोटला रोड, नई दिल्ली-110002 के पते पर अथवा regulation@fssai.gov.in ईमेल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं।

निर्धारित अवधि में प्राप्त अभ्यावेदनों पर विचार करने के बाद प्राधिकरण संशोधन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इसलिए प्रस्तावित प्रतिबंध को अभी लागू अंतिम नियम नहीं माना जाना चाहिए। यह कदम शिशु पोषण उत्पादों की सुरक्षा, गुणवत्ता और आयु के अनुरूप पोषण मानकों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
