देशभर में आज महाष्टमी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शारदीय नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। सुबह से ही देवी मंदिरों और दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त मां दुर्गा के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और कल्याण की कामना कर रहे हैं। मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान, मंत्रोच्चार और आरती के आयोजन हो रहे हैं। अनेक स्थानों पर दुर्गा सप्तशती का पाठ, पुष्पांजलि और कन्या पूजन की तैयारियां भी की जा रही हैं।
महाष्टमी को नवरात्र का विशेष महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना करते हैं। पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों में दुर्गा पूजा की विशेष रौनक है। भव्य पंडालों, आकर्षक सजावट और धार्मिक आयोजनों के बीच श्रद्धालु देवी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि, कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई दुखद भगदड़ की घटना के बाद उत्सव के माहौल में शोक भी व्याप्त है।
कोलकाता की घटना में 19 लोगों की मौत, सात आरोपी पुलिस हिरासत में
कोलकाता के चोरबागान क्षेत्र में दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर की शाम हुई भगदड़ में कम से कम 19 लोगों की मृत्यु हो गई, जबकि लगभग 25 लोग घायल हुए। भारी बारिश के बीच पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने और बाहर निकलने के दौरान अफरा-तफरी की स्थिति बनने की बात सामने आई है। संकरी गलियों, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठे हैं। घटना के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
इस मामले में गिरफ्तार सात आरोपियों को कोलकाता की बैंकशाल अदालत ने 18 अक्टूबर को दस दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। आरोपियों में पूजा आयोजन समिति के पदाधिकारी, पंडाल निर्माण से जुड़े व्यक्ति, भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मी और निजी सुरक्षा से जुड़े लोग शामिल हैं। पुलिस घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और कथित लापरवाही से संबंधित पहलुओं की जांच कर रही है। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने की घोषणा भी की गई है।

प्रशासन ने दुर्गा पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने, भीड़ पर नियंत्रण रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। देशभर में महाष्टमी के धार्मिक आयोजनों के बीच कोलकाता की घटना ने बड़े सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा और उचित भीड़ प्रबंधन की आवश्यकता को फिर रेखांकित किया है।
