भारत ने ‘एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026’ का आयोजन किया

‘एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन’ (एडब्ल्यूसी) 2026 का 7वां संस्करण आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुआ। यह आयोजन कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा को एक साथ जोड़ने के देश के प्रयासों में एक प्रमुख और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के लिए आयोजित होने वाला यह प्रमुख वैश्विक सम्मेलन पहली बार भारत में हो रहा है। इससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और टिकाऊ विकास को एक साथ आगे बढ़ाने में भारत की बढ़ती भूमिका और अधिक मजबूत होती है।

तीन दिनों तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित सम्मेलन का आयोजन नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा किया जा रहा है। इसमें जर्मनी के पर्यावरण, जलवायु कार्रवाई, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा मंत्रालय (बीएमयूवी) का सहयोग प्राप्त है, और इसे ‘कोनेक्सियो-पीएसई के साथ मिलकर ‘पावरिंग द ग्लोबल साउथ’ (ग्लोबल साउथ को ऊर्जा प्रदान करना) विषय के अंतर्गत आयोजित किया गया है।

यह सम्मेलन माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिपादित “पावर से एम्पावर” (शक्ति से सशक्तिकरण) की मूल परिकल्पना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत का स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन कृषि क्षेत्र की रूपरेखा को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। इससे किसान पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर, केवल ‘अन्नदाता’ (भोजन उत्पादक) ही नहीं, बल्कि ‘ऊर्जादाता’ (स्वच्छ ऊर्जा उत्पादक) के रूप में भी उभर रहे हैं। माननीय प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा उपयोग में परिवर्तन ने ग्रामीण उद्यमिता इकोसिस्टम के विस्तार, वित्तीय मॉडलों को बेहतर बनाने और देश भर में दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती लाने के लिए नए अवसर खोले हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हितधारकों, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे मिलकर ‘प्रिसिजन एग्रीवोल्टाइक्स’ (कृषि और सौर ऊर्जा के एकीकृत समाधान) को बड़े पैमाने पर लागू करें, जिससे किसानों की आय बढ़े और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव की प्रक्रिया भी तेज हो।

पहले दिन के उद्घाटन समारोह की शुरुआत गणमान्य अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सचिव श्री संतोष के. सारंगी ने स्वागत भाषण दिया और सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। एक वीडियो के माध्यम से तीन दिवसीय आयोजन के संदर्भ और इसके मुख्य विषय “ग्लोबल साउथ को ऊर्जा प्रदान करना” (पॉवरिंग द ग्लोबल साउथ) को प्रस्तुत किया गया।

उद्घाटन समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अपने विचार रखे। इसके साथ ही, जर्मनी के पर्यावरण, जलवायु कार्रवाई, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा मामलों के संघीय मंत्री श्री कार्स्टन श्नाइडर का एक वीडियो संदेश भी दिखाया गया। भारत और भूटान में जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर विक ने सम्मेलन के समापन अवसर पर विशेष संबोधन दिया। इस कार्यक्रम में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक भी उपस्थित थे।

औपचारिक आरंभिक सत्र में तीन ज्ञान संसाधन पेश किए गए: इंडिया एग्रीवोल्टाइक्स एलायंस (आईएए) द्वारा विकसित ‘डिसीजन-मेकिंग टूल’, इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (आईडब्ल्यूएमआई) द्वारा तैयार ‘बुक ऑफ एब्सट्रैक्ट्स’, और एमएनआरई की ‘एग्री-पीवी पॉलिसी हैंडबुक’।

इस सम्मेलन में 1200 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें 150 से अधिक विदेशी प्रतिभागी भी थे। इनमें अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, शोधकर्ता, उद्योग जगत के जाने माने प्रतिनिधि, इनोवेटर, स्टार्टअप और विकास साझेदार शामिल हैं। यह आयोजन ज्ञान के आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और ‘साउथ-साउथ सहयोग’ (विकासशील देशों के बीच आपसी सहयोग) के लिए एक मंच प्रदान करता है। यह व्यापक भागीदारी ऊर्जा आत्मनिर्भरता को कृषि सुरक्षा के साथ जोड़ने की एक एकीकृत सुशासन रणनीति को दर्शाती है।

इस आयोजन में विज्ञान, नीति और नवाचार के संदर्भ में एक व्यापक इकोसिस्टम एकीकरण देखने को मिला। इसके अंतर्गत, कार्यक्रम में दो समानांतर वैज्ञानिक ट्रैकों के साथ-साथ विशेष रूप से भारत पर केंद्रित एक ट्रैक भी शामिल है। सम्मेलन के दौरान नवाचार, राज्यों की भूमिका, फसल उत्पादकता, नीतिगत ढांचे, वित्तपोषण मॉडल, तकनीक को लागू करने, जलवायु के प्रति अनुकूलन और किसानों पर केंद्रित व्यावसायिक मॉडलों पर चर्चा की जाएगी।

इसके अलावा, एक समर्पित स्टार्टअप और नवाचार मंच – जिसमें एक इंटरैक्टिव ‘एग्रीवोल्टाइक्स पिच हब’ भी शामिल है – अगली पीढ़ी के तकनीकी समाधानों को प्रदर्शित कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म क्लीन-टेक इनोवेटर्स, स्टार्टअप्स, वेंचर कैपिटलिस्ट्स और वैश्विक उद्योग जगत के दिग्गजों के बीच की दूरी को कम करने का काम कर रहा है।

एग्रीवोल्टाइक्स एक ऐसा क्रांतिकारी अवसर प्रदान करता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कम रोजगार की समस्या को दूर किया जा सकता है, स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिल सकता है, किसानों की आय बढ़ सकती है, फसलों के लिए अनुकूल सूक्ष्म-जलवायु (माइक्रोक्लाइमेट) सुरक्षित रह सकती है, और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों के बीच टिकाऊ आजीविका सुनिश्चित की जा सकती है। ऐसा भूमि के दोहरे उपयोग—खाद्य उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा—के माध्यम से संभव होता है। सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों ने ग्रामीण भारत में जलवायु-अनुकूल कृषि के निर्माण और टिकाऊ आजीविका के सृजन में एग्रीवोल्टाइक्स की भूमिका पर बल दिया।

सम्मेलन की चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि कृषि का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल तकनीक के संगम पर टिका है। एग्रीवोल्टाइक्स भारत में पारंपरिक कृषि से ‘टेक्नो-एग्रीकल्चर’ (तकनीक-आधारित कृषि) की ओर एक बड़ा बदलाव है। इसमें सौर ऊर्जा को प्रिसिजन फार्मिंग (सटीक खेती), स्मार्ट सिंचाई, डिजिटल तकनीकों और नए व्यापार मॉडल के साथ जोड़ा जाता है।

उम्मीद है कि 7वां ‘एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन’ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाएगा। इससे वैश्विक खाद्य और ऊर्जा प्रणालियों के लिए एक अनुकूल और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में भारत की अग्रणी भूमिका और मजबूत होगी।

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