सेना के सहयोग से 12 राज्यों में 60 हजार नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक तैयार करेगा गृह मंत्रालय

नवंबर के दूसरे सप्ताह तक 600 मास्टर प्रशिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने का लक्ष्य, ड्रोन हमलों, साइबर सुरक्षा और आपातकालीन बचाव पर रहेगा जोर

नई दिल्ली। देश में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय भारतीय सेना के सहयोग से एक विशेष प्रायोगिक परियोजना शुरू करने जा रहा है। इसके तहत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 60 हजार नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध जैसी परिस्थितियों और आपातकालीन घटनाओं से निपटने के लिए नागरिकों की तैयारी और क्षमता को बढ़ाना है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, परियोजना के पहले चरण में संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नागरिक सुरक्षा मास्टर प्रशिक्षकों को तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक सहभागी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से 50 प्रशिक्षकों का चयन किया जाएगा। इस तरह कुल 600 मास्टर प्रशिक्षकों को भारतीय सेना के निर्धारित प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रत्येक मास्टर प्रशिक्षक 100 स्वयंसेवकों को देगा प्रशिक्षण

इस परियोजना के तहत प्रशिक्षित किए जाने वाले 600 मास्टर प्रशिक्षकों के माध्यम से आगे लगभग 60 हजार नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक मास्टर प्रशिक्षक 100 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेगा। इससे स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित नागरिकों का ऐसा नेटवर्क विकसित करने में मदद मिलेगी, जो संकट की स्थिति में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर सके।

ड्रोन हमलों और आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों पर विशेष ध्यान

प्रशिक्षण कार्यक्रम में आधुनिक एवं हाइब्रिड युद्ध, ड्रोन से उत्पन्न खतरों और हवाई हमलों के प्रति जागरूकता पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, खोज एवं बचाव कार्य, घायलों की प्राथमिक देखभाल तथा रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से संबंधित आवश्यक जानकारी भी दी जाएगी।

कार्यक्रम में आपातकालीन संचार व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा, नागरिक-सैन्य समन्वय तथा संकट के दौरान प्रभावी नेतृत्व और नियंत्रण जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य स्वयंसेवकों को विभिन्न प्रकार की आपातकालीन परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार करना है।

प्रधानमंत्री की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में आधुनिक प्रणालियों, उन्नत तकनीक और आपात स्थितियों से निपटने की बेहतर तैयारी से युक्त एक सशक्त नागरिक सुरक्षा नेटवर्क विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की थी। गृह मंत्रालय की यह पहल उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस परियोजना के माध्यम से नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को केवल पारंपरिक आपदाओं से निपटने के लिए ही नहीं, बल्कि बदलती सुरक्षा परिस्थितियों और तकनीकी खतरों के प्रति भी जागरूक एवं सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रायोगिक परियोजना के अनुभवों के आधार पर भविष्य में इस व्यवस्था के विस्तार की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।

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