बैंक जमा, शेयर, बीमा, डाकघर की बचत और पेंशन की राशि वास्तविक मालिकों तक पहुंचाने पर जोर, ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान की हुई समीक्षा
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों में बिना दावे के पड़ी धनराशि को उसके वास्तविक मालिकों तक जल्द पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संबंधित नियामकों और वित्तीय संस्थानों से इस प्रक्रिया में तेजी लाने तथा लोगों को उनकी वैध वित्तीय संपत्तियां वापस दिलाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने को कहा है। यह निर्देश 23 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की 30वीं बैठक के दौरान दिए गए।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों में बैंक जमा, लाभांश, शेयर, डाकघर के खाते, बीमा की राशि और पेंशन निधि शामिल हैं। कई बार खाताधारक की मृत्यु, पुराने पते या संपर्क विवरण, दस्तावेजों की कमी अथवा जानकारी के अभाव के कारण संबंधित धनराशि लंबे समय तक उसके वास्तविक हकदार तक नहीं पहुंच पाती। सरकार का जोर ऐसी संपत्तियों की पहचान कर पात्र व्यक्तियों और उनके वैध उत्तराधिकारियों को राशि वापस दिलाने पर है।
‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान की समीक्षा
बैठक में ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान के अंतर्गत जिला स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। इस अभियान का उद्देश्य विभिन्न वित्तीय संस्थानों में बिना दावे के पड़ी संपत्तियों का पता लगाना और उन्हें उनके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाने में सहायता करना है। परिषद ने संबंधित मंत्रालयों और नियामकों को समयबद्ध तरीके से धनराशि लौटाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने का निर्देश दिया।
इस पहल के तहत लोगों को अपनी पुरानी बैंक जमा, निवेश, बीमा दावों और अन्य वित्तीय संपत्तियों की जानकारी प्राप्त करने तथा उन पर दावा प्रस्तुत करने के लिए जागरूक करना महत्वपूर्ण है। पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन के बाद संबंधित संस्थान नियमानुसार दावे का निपटारा करते हैं।
केवाईसी प्रक्रिया आसान बनाने और साइबर सुरक्षा मजबूत करने पर जोर
वित्त मंत्री ने वित्तीय सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए ग्राहक पहचान प्रक्रिया यानी केवाईसी को सरल और सुविधाजनक बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। बैठक में डिजिटल माध्यम से ग्राहक पहचान और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
इसके साथ ही सरकारी सूचना प्रणालियों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की साइबर सुरक्षा मजबूत करने पर विचार किया गया। वित्तीय क्षेत्र की साइबर सुरक्षा रणनीति, महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा और उभरते डिजिटल खतरों से निपटने की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।
आर्थिक स्थिरता और वित्तीय क्षेत्र के सुधारों पर चर्चा
बैठक में देश की व्यापक आर्थिक एवं वित्तीय स्थिरता, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते प्रभाव और वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि से उत्पन्न संभावित जोखिमों पर चर्चा हुई। वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए प्रयोग, निवेश को बढ़ावा देने और वित्तीय तथा अन्य वास्तविक संपत्तियों को डिजिटल टोकन में बदलने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
वैश्विक परिस्थितियों में बढ़ती अनिश्चितता को देखते हुए निर्मला सीतारमण ने परिषद की बैठकें पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अधिक नियमित अंतराल पर आयोजित करने की आवश्यकता बताई।

बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा, मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन और वित्तीय क्षेत्र के विभिन्न नियामकों एवं मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
