छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर नक्सल विरोधी अभियान तेज करने की रणनीति पर मंथन, नारायणपुर में अंतर्राज्यीय समन्वय बैठक

नारायणपुर, 28 जुलाई 2026/ नारायणपुर में आज आयोजित अंतर्राज्यीय समन्वय बैठक में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित नक्सल विरोधी अभियानों की व्यापक समीक्षा की गई। बैठक में दोनों राज्यों के पुलिस एवं सुरक्षा बलों के बीच आपसी समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने, खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रणनीति के तहत अभियान संचालित करने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस नक्सल विरोधी अभियान छत्तीसगढ़ विवेकानंद, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्पेशल ऑप्स महाराष्ट्र डॉ. छेरिंग दोरजे, संयुक्त निदेशक इंटेलिजेंस ब्यूरो तथा विशेष पुलिस महानिरीक्षक नागपुर रेंज महाराष्ट्र संदीप पाटिल शामिल हुए। वहीं नारायणपुर में भौतिक रूप से आयोजित बैठक में पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज बी.एन. मीणा, पुलिस अधीक्षक गढ़चिरौली एम. रमेश, पुलिस अधीक्षक कांकेर निखिल राकेचा, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर संदीप कुमार पटेल, पुलिस अधीक्षक बीजापुर उमेश गुप्ता सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिलों में वर्तमान सुरक्षा स्थिति का विस्तार से आकलन किया गया। अधिकारियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों की स्थिति, सुरक्षा बलों की तैनाती, पूर्व में संचालित अभियानों के परिणाम तथा भविष्य की कार्ययोजना को लेकर विचार-विमर्श किया। इस दौरान दोनों राज्यों की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के साथ संयुक्त अभियानों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।

अधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा से लगे जंगल एवं दूरस्थ क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हैं। ऐसे क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियानों को प्रभावी बनाने के लिए दोनों राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय और सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान आवश्यक है। बैठक में इसी दिशा में आपसी सहयोग को और मजबूत करने तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए संयुक्त रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी।

बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त नक्सल विरोधी अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने, खुफिया सूचनाओं को साझा करने की प्रक्रिया को तेज करने तथा सूचनाओं के आधार पर तत्काल समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर दोनों राज्यों की संबंधित इकाइयों के बीच तत्काल संपर्क स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि नक्सली गतिविधियों को किसी भी स्तर पर विस्तार का अवसर न मिल सके।

सुरक्षा बलों के मध्य बेहतर समन्वय को बैठक में अभियान की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि संयुक्त अभियान के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना आवश्यक है। साथ ही सुरक्षा बलों को पेशेवर कार्यशैली के साथ उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का विश्लेषण कर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में सतत निगरानी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। जंगल और पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा बलों की गतिविधियों को प्रभावी बनाने, संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने तथा नक्सलियों के संभावित ठिकानों और आवाजाही के मार्गों पर नजर रखने की रणनीति पर अधिकारियों ने विचार-विमर्श किया। दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से सुरक्षा बलों की पहुंच को और मजबूत करने तथा नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने की दिशा में संयुक्त प्रयासों को गति देने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों ने कहा कि नक्सल विरोधी अभियान केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास का वातावरण तैयार करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए स्थानीय जनता का विश्वास और सहयोग बेहद जरूरी है। बैठक में जनसहयोग को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा बलों तथा प्रशासन के प्रति विश्वास का वातावरण बनाए रखने पर भी चर्चा की गई।

वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मजबूत खुफिया तंत्र नक्सल विरोधी अभियानों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्थानीय स्तर पर प्राप्त सूचनाओं का समयबद्ध विश्लेषण और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ उसका तत्काल आदान-प्रदान अभियान को अधिक प्रभावी बना सकता है। इस दिशा में दोनों राज्यों की पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की गई।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए दोनों राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों को एक-दूसरे के साथ नियमित संपर्क और समन्वय बनाए रखना होगा। इसके लिए आवश्यकता के अनुसार संयुक्त बैठकें, साझा रणनीति और समन्वित अभियान चलाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जाएंगे।

अधिकारियों ने सुरक्षा बलों के जवानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अभियान के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया। चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में अभियान संचालित करने के दौरान बेहतर योजना, आपसी संचार और त्वरित निर्णय क्षमता को महत्वपूर्ण बताया गया।

बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियों को रोकने के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और विकास कार्यों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की रणनीति पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। जब क्षेत्र में सुरक्षा का वातावरण मजबूत होगा, तब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।

नारायणपुर, कांकेर, बीजापुर और गढ़चिरौली सहित सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की सुरक्षा स्थिति और नक्सल विरोधी अभियानों से संबंधित जानकारी बैठक में साझा की। इस दौरान क्षेत्रवार चुनौतियों, अभियान के दौरान सामने आने वाली परिस्थितियों तथा संयुक्त कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर मजबूत सूचना तंत्र विकसित करना आवश्यक है। स्थानीय नागरिकों के सहयोग से प्राप्त सूचनाओं को सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाने और उनकी गोपनीयता बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।

बैठक में यह प्रतिबद्धता व्यक्त की गई कि छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा से लगे क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियान को पूरी गंभीरता और समन्वित रणनीति के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। दोनों राज्यों के सुरक्षा बल एक-दूसरे के साथ लगातार संपर्क में रहकर नक्सलियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करेंगे और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं सुरक्षा स्थापित करने के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखेंगे।

अधिकारियों ने कहा कि नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ क्षेत्र में विकास और जनकल्याण की गतिविधियों को भी गति देना आवश्यक है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में शासन की योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वास का वातावरण मजबूत होगा और विकास की प्रक्रिया को नई गति मिलेगी।

बैठक के अंत में सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित कार्ययोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही अंतर्राज्यीय समन्वय को निरंतर बनाए रखने, खुफिया सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान करने और संयुक्त अभियानों को बेहतर तालमेल के साथ संचालित करने पर जोर दिया गया।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि नक्सल विरोधी अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए दोनों राज्यों की पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में सतत निगरानी, संयुक्त रणनीति और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के प्रयास जारी रहेंगे।

नारायणपुर में आयोजित यह अंतर्राज्यीय समन्वय बैठक छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियान को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में लिए गए निर्णयों और तैयार की गई कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने तथा नक्सल विरोधी अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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